विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि फ्रांस भारत के सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में शामिल है। उन्होंने कहा कि बहुध्रुवीय विश्व के लिए प्रतिबद्ध दो देशों के तौर पर, इस समय वैश्विक राजनीति को स्थिर करने के लिए मिलकर काम करना महत्वपूर्ण है। पेरिस में फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यों-नोएल बैरोट के साथ बैठक में डॉ. जयशंकर ने कहा कि लगातार बातचीत संबंधों को मजबूत बनाने के लिए महत्वपूर्ण है।
फ्रांस हमारे सबसे पुराने रणनीतिक साझेदारों में से एक है और यूरोप में पहला रणनीतिक साझेदार है। हमारी विशेष बैठक व्यापक वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में हो रही है। हमें विभिन्न मंचों पर वैश्विक और क्षेत्रीय महत्व के मुद्दों पर सार्थक चर्चा करनी चाहिए और हम ऐसा कर रहे।
विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर ने कहा है कि दुनिया में उथल-पुथल मची हुई है और ऐसे बड़े बदलाव हुए हैं जो वैश्विक व्यवस्था को ही फिर से परिभाषित कर सकते हैं। भारत-वाइमर प्रारूप की बैठक में डॉ. जयशंकर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उथल-पुथल देखी जा रही है। उन्होंने वाइमर प्रारूप की बैठक के लिए भारत को मिले निमंत्रण की सराहना की। इसमें फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के विदेशमंत्री शामिल हुए। विदेश मंत्री ने कहा कि चर्चा मुख्य रूप से भारत-यूरोपीय संघ संबंधों, हिंद-प्रशांत और यूक्रेन संघर्ष पर केंद्रित रही।
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