निर्वाचन आयोग ने निर्देश जारी किया है कि पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा 2010 के बाद जारी अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्रों को विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी मसौदा मतदाता सूची में दावों और आपत्तियों के निपटान के दौरान वैध पहचान दस्तावेज नहीं माना जाएगा। यह कदम पिछले वर्ष 24 दिसंबर को कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के बाद आया है जिसमें 2010 से 2024 के बीच जारी एक सौ 13 समुदायों के अन्य पिछड़ा वर्ग प्रमाण-पत्र कानूनी वैधता पूरी न होने के कारण रद्द कर दिए गये थे। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अन्य पिछड़ा वर्ग समुदाय के लोग पात्र मतदाता है, लेकिन 2010 के बाद के उनके प्रमाण-पत्रों को चुनाव संबंधी मामलों में पहचान या समुदाय वर्ग के प्रमाण के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
कोच्चि स्थित आईसीएआर-सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईसीएआर-सीएमएफआरआई) ने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि…
विश्वस्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, भारतीय…
बंगाल की खाड़ी पर बना निम्न दबाव उत्तरी आंध्र प्रदेश और ओडिशा के दक्षिणी तट…
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कल न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र…
राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड ने अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर नीट पीजी-2026 का परिणाम घोषित…
भारतीय रेल ने पश्चिम रेलवे के वडोदरा डिवीजन (मंडल) के अलकापुरी में 166.5 करोड़ रुपये…