सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और निर्वाचन आयोग के दिशानिर्देशों के अनुसार, चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में अपूर्ण अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की है। विशेष गहन पुनरीक्षण- एस आई आर प्रक्रिया के बाद प्रकाशित इस अपूर्ण अंतिम सूची के अनुसार मतदाताओं की कुल संख्या 7 करोड़ 4 लाख 59 हजार 284 है।
मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने बताया कि मसौदा प्रकाशन के समय मतदाताओं की कुल संख्या 7 करोड़ 8 लाख 16 हजार 630 थी। एस आई आर में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के माध्यम से, अंतिम सूची से 5 लाख 46 हजार 53 नाम हटा दिए गए हैं। मसौदा सूची में ही 58 लाख 20 हजार से अधिक नाम हटा दिए गए थे। कुल मिलाकर, राज्य की मतदाता सूची से अब तक 63 लाख 66 हजार 952 नाम हटाए जा चुके हैं।
कुल 60 लाख 6 हजार 675 मतदाताओं के नाम विचाराधीन हैं, लेकिन उन्हें भी अंतिम सूची में शामिल कर लिया गया है। इन मतदाताओं का भविष्य एसआईआर प्रक्रिया में लगे न्यायिक अधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगा।
मुख्य चुनाव अधिकारी ने बताया कि सुनवाई के बाद, ईआरओ और एईआरओ ने सभी दस्तावेजों की जांच की और संबंधित मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए। हालांकि, यदि कोई नाम गलती से हटा दिया गया है, तो उसे पुनः शामिल करने की प्रक्रिया है। संबंधित मतदाता अगले 15 दिनों के भीतर दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
अंतिम सूची सभी मतदान केंद्रों पर प्रदर्शित कर दी गई है और जनता की पहुंच के लिए निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों और सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों के कार्यालयों में भी रखी गई है। मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को इसकी प्रतियां पहले ही उपलब्ध करा दी गई हैं। इसके अतिरिक्त, मतदाता निर्वाचन आयोग और राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की वेबसाइटों के साथ-साथ ईसीआई नेट ऐप के माध्यम से अपने ईपीआईसी नंबर का उपयोग करके सूची में अपना नाम देख सकते हैं।
अफगानिस्तान के कुनार खोस्त और पक्तिका प्रांत में पाकिस्तानी सेना के हवाई हमलों में 13…
अमरीका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। दोनों देशों की…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आंध्र प्रदेश की…
सरकार ने वस्त्रों के लिए उत्पादन-संबंधी प्रोत्साहन (पीएलआई) स्कीम के तीसरे चरण के तहत 22…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अहमदाबाद मेट्रो रेल परियोजना के चरण…
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज एक प्रस्ताव पारित कर 10 जून, 2026 को भारतीय लोकतंत्र की…