ELCINA द्वारा विकसित EMC और सहस्रा सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की सेमीकंडक्टर ATMP/OSAT प्लांट का आज उद्घाटन किया गया
राजस्थान के भिवाड़ी के खुशखेड़ा स्थित सलारपुर में ईएलसीआईएनए द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी) और सहस्रा सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी प्लांट का आज उद्घाटन किया गया। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वर्चुअल माध्यम से इनका शुभारंभ किया।
इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा और केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भी उपस्थिति रहे।
यह आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और सेमीकंडक्टर के लिए वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह प्रगति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू की गई ‘मेक इन इंडिया’, ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी दूरदर्शी योजनाओं द्वारा संचालित है।
अश्विनी वैष्णव ने इस अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित किया। अश्विनी वैष्णव ने इस दिन को राजस्थान के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया, क्योंकि राज्य सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रवेश कर रहा है। यह भू-राजनीतिक दृष्टिकोण से विश्व स्तर पर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उद्योग है।
उन्होंने पिछले 12 वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में भारत की तीव्र प्रगति की जानकारी दी। इस दौरान उत्पादन 6 गुना बढ़कर लगभग ₹13 लाख करोड़ तक पहुंच गया है; और निर्यात बढ़कर लगभग ₹4.24 लाख करोड़ हो गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मोबाइल फोन अब भारत की शीर्ष निर्यात वस्तु बन गए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दिया, जिन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर को ‘फोकस सेक्टर’ (केंद्रित क्षेत्रों) के रूप में प्राथमिकता दी है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ (ईसीएमएस), ‘इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स’ (ईएमसी), ‘इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन’ (आईएसएम) और ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ (पीएलआई) जैसी योजनाओं को राज्य सरकारों और उद्योगों के साथ मिलकर व्यवस्थित तरीके से लागू किया जा रहा है।
राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा ने इस बात पर ज़ोर दिया कि राज्य सरकार ने मार्च 2026 में ‘राजस्थान सेमीकंडक्टर नीति’ जारी की है। उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के नज़दीकी क्षेत्र को विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता बताया है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पहले भिवाड़ी क्षेत्र मुख्य रूप से ऑटोमोबाइल क्षेत्र के लिए जाना जाता था, लेकिन अब यहाँ सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
ईएलसीआईएनए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (ईएमसी)
भिवाड़ी में इस क्लस्टर को 50.3 एकड़ ज़मीन पर ₹46.09 करोड़ की परियोजना लागत से विकसित किया गया है। भारत सरकार ने ईएमसी योजना के तहत ₹20.24 करोड़ की प्रत्यक्ष सहायता दी है।
इस क्लस्टर को मैसर्स ईएलसीआईएनए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड (एसपीवी) ने बनाया है। यह ईएलसीआईएनए के बैनर तले एमएसएमई उद्योगपतियों की मिली-जुली पहल है।
इसमें दुनिया-भर की बेहतरीन अवसंरचना सुविधाएँ हैं, जिनमें बिना रुकावट बिजली और पानी की सप्लाई, अंदरूनी सड़कें, एक ही जगह से संचालित प्रशासनिक सुविधाएँ, परीक्षण और प्रशिक्षण केंद्र और स्मार्ट क्लासरूम एवं लैब वाला विशेष कौशल विकास केंद्र शामिल हैं।
यह क्लस्टर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के पास विशेष स्थान पर बना है, जहाँ सड़क, रेल और हवाई जहाज़ से आने-जाने की बढ़िया सुविधाएँ हैं। इसके साथ ही आशा है कि यह क्लस्टर इलेक्ट्रॉनिक्स के पुर्ज़े बनाने का बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।
ईएमसी ने अब तक 20 कंपनियों से ₹1,200 करोड़ से ज़्यादा के निवेश की योजनाएँ आकर्षित की हैं। ये कंपनियाँ सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक पुर्ज़ों से लेकर एयर कंडीशनर, आरएफआईडी प्रौद्योगिकी, ईवी के पुर्ज़े और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रही हैं। अभी ग्यारह कंपनियाँ काम कर रही हैं, जिनमें कुल ₹900 करोड़ से ज़्यादा का निवेश हुआ है, और जिनसे 2,700 से ज़्यादा लोगों को रोज़गार मिला है।
इस क्लस्टर में काम कर रही मुख्य कंपनियों में Aisan Fiem Industries, E-Pack Durable, Sahasra Semiconductor, Sahasra Electronics, Varada Green Energy, Duggar Power Products और Electronics Sector Skill Council of India इत्यादि शामिल हैं।
सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी सुविधा
मैसर्स सहस्रा सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड का यह प्लांट भारत का पहला लघु और मध्यम उद्यम (एसएमई) है जिसने सेमीकंडक्टर चिप्स का वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया है।
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) की ‘इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और सेमीकंडक्टर्स के निर्माण को बढ़ावा देने की योजना’ (एसपीईसीएस) के तहत विकसित, यह प्लांट ₹150 करोड़ से अधिक के निवेश के साथ स्थापित किया गया है। यह 57,000 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला है और इसमें क्लास 10K और 100K क्लीनरूम्स लगे हैं। इस प्लांट में Micro SD और फ्लैश स्टोरेज जैसे उत्पादों के लिए मेमोरी चिप्स, साथ ही LED ड्राइवर ICs, eSIMs और RFID उत्पादों की पैकेजिंग की जाएगी।
इस प्लांट की वर्तमान में 60 मिलियन सेमीकंडक्टर यूनिट्स की वार्षिक पैकेजिंग क्षमता है, जिसमें SPECS-समर्थित अनुमानित क्षमता लगभग 43 मिलियन यूनिट्स है। अगले 2-3 वर्षों में इसकी वार्षिक क्षमता को बढ़ाकर लगभग 400-600 मिलियन यूनिट्स तक ले जाने की योजना है।
यह प्लांट पहले से ही अपने उत्पादन का 60% से अधिक हिस्सा वैश्विक बाजारों में निर्यात कर रहा है, जिनमें संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस और पूर्वी यूरोप, चीन और नेपाल शामिल हैं।
यह प्लांट अब अपने स्वयं के उत्पादअनुसंधान एवं विकास (R&D) की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें LED ड्राइवर चिप्स और अन्य सेमीकंडक्टर उत्पाद शामिल हैं। यह ESSCI और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और हाई-टेक विनिर्माण में युवाओं के प्रशिक्षण में भी सहायता करेगा।
वर्तमान वैश्विक स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अपील के मद्देनज़र यह कार्यक्रम वर्चुअली आयोजित किया गया, जिसमें उन्होंने जहाँ भी संभव हो, ईंधन के उपयोग को कम करने का आग्रह किया था।




