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यूरोपीय संघ के नियामक ढांचे के तहत भारत का सितंबर 2026 के बाद यूरोपीय संघ को जलीय कृषि उत्पाद, शहद, अंडे और पशु आंतों के निर्यात में निरंतर बाजार पहुंच सुनिश्चित

भारत के कृषि और समुद्री उत्पाद निर्यात संबंधी उल्लेखनीय व्यापारिक बढ़त में संशोधित यूरोपीय संघ नियामक ढांचे के तहत सितंबर 2026 के बाद उसे यूरोपीय संघ को जलीय कृषि उत्पाद, अंडे, शहद और पशु आंत निर्यात करने वाले अधिकृत देशों की सूची में शामिल किया गया है।

रोगाणुरोधी प्रतिरोध संबंधी बढ़ती चिंताओं को देखते हुए, यूरोपीय संघ ने आयोग के कार्यान्वयन विनियमन 2026/1189 द्वारा विनियमन 2021/405 में संशोधन किया है। संशोधित विनियमन सितंबर 2026 से प्रभावी होगा जिसमें यूरोपीय संघ को निर्दिष्ट पशु-उत्पत्ति वाले उत्पाद निर्यात करने वाले देशों के लिए अतिरिक्त शर्तें निर्धारित की गई हैं।

अधिकृत देशों की सूची में शामिल होने से भारत सितंबर 2026 के बाद भी यूरोपीय संघ के बाजार में इन उत्पादों का निर्यात कर पाएगा। जलीय कृषि उत्पाद के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यूरोपीय संघ को भारत अभी लगभग 1.59 अरब डॉलर मछली और मत्स्य उत्पादों का का निर्यात करता है।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग द्वारा निर्यात निरीक्षण परिषद और अन्य हितधारकों के साथ घनिष्ठ तालमेल रखते हुए निरंतर प्रयास से यह उल्लेखनीय प्रगति संभव हुई है। नियामक आवश्यकताओं और बाजार पहुंच संबंधी मुद्दों को सुलझाने के लिए वाणिज्य विभाग यूरोपीय आयोग के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है, जबकि निर्यात निरीक्षण परिषद ने यूरोपीय संघ के नियमों के अनुरूप बेहतर निरीक्षण, जांच और प्रमाणन उपायों से भारत की आधिकारिक नियंत्रण प्रणाली सुदृढ़ की है।

निर्यात निरीक्षण परिषद और समुद्री उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण – एमपीईडीए सहित अन्य हितधारकों के साथ वाणिज्य विभाग यूरोपीय संघ द्वारा अनुमोदित प्रतिष्ठानों और नियामक प्राधिकरणों के साथ निकट सहयोग से काम करना जारी रखेगा ताकि नियामक आवश्यकताओं का सुचारू कार्यान्वयन सुनिश्चित हो और निर्यात उत्पादों की गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा के उच्च मानक बनाए रखे जाएं।

यूरोपीय संघ के संशोधित नियमों में भारत के शामिल होने से देश के निर्यातकों के लिए निरंतर बाजार पहुंच, व्यापार में बढ़ोतरी और संबंधित क्षेत्रों में नए अवसर उत्पन्न होने की संभावना है।

केंद्र सरकार निर्यात को बढ़ावा देने, संस्थागत क्षमता सुदृढ़ बनाने और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के साथ आर्थिक सहयोग मजबूत बनाने को प्रतिबद्ध है।

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