प्रयागराज महाकुंभ 2025 के तीसरे अमृत स्नान, बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारियां की हैं। करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा सुनिश्चित करने के लिए 1200 से अधिक डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की तैनाती की गई है। इसी क्रम में महाकुंभनगर में डॉक्टरों की एक विशेष चार सदस्यीय टीम ने सभी अस्पतालों का निरीक्षण किया और चिकित्सा व्यवस्थाओं की समीक्षा की।
निरीक्षण के दौरान टीम ने स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल, तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय समेत अन्य प्रमुख अस्पतालों का दौरा किया। स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल में 500 से अधिक स्टाफ को अलर्ट मोड में रखा गया है, जबकि 150 से अधिक चिकित्सकीय कर्मियों को आपातकालीन परिस्थितियों के लिए विशेष रूप से तैनात किया गया है। वहीं, एसआरएन अस्पताल में 30 सीटी स्कैन मशीनों को पूरी तरह से तैयार किया गया है, जिससे एमआरआई, अल्ट्रासाउंड और अन्य आवश्यक जांचों की सुविधा तत्काल उपलब्ध हो सके। इसके अलावा, अस्पताल में 60 वरिष्ठ रेजिडेंट डॉक्टर ड्यूटी पर रहेंगे, जबकि 200 यूनिट ब्लड बैंक की व्यवस्था भी पूरी कर ली गई है। सभी अस्पतालों में आपातकालीन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अलार्म सिस्टम से जोड़ा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई की जा सके।
महाकुंभ मेला के नोडल चिकित्सा अधिकारी, डॉ. गौरव दुबे ने बताया कि आपातकालीन सेवाओं में विशेष रूप से एंबुलेंस सेवा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। किसी भी गंभीर स्थिति में मरीजों को तुरंत स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल या तेज बहादुर सप्रू चिकित्सालय (बेली अस्पताल) में शिफ्ट किया जाएगा। प्रशासन के निर्देशानुसार, 5 फरवरी तक किसी भी डॉक्टर या मेडिकल स्टाफ को अपने ड्यूटी स्थल से हटने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
इसके अतिरिक्त, मेला क्षेत्र में विशेष चिकित्सा व्यवस्थाओं के तहत 100 बेड के एक अत्याधुनिक सेंट्रल हॉस्पिटल, 25 बेड के दो सब-सेंट्रल हॉस्पिटल, 20 बेड के आठ सेक्टर हॉस्पिटल और 20 बेड के दो संक्रामक रोग हॉस्पिटल को सक्रिय किया गया है। इसके अलावा, 10 स्थानों पर फर्स्ट एड पोस्ट भी बनाए गए हैं, जहां मामूली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
मेडिकल टीमों को बैकअप के रूप में भी तैयार रखा गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में वे तुरंत सक्रिय हो सकें। श्रद्धालुओं की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को मेले के दौरान तीन से चार दिनों तक मेला क्षेत्र में ही तैनात रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की इन तैयारियों से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालु निर्बाध रूप से स्नान और अन्य धार्मिक अनुष्ठान कर सकें, जबकि किसी भी चिकित्सकीय आवश्यकता का त्वरित समाधान उपलब्ध हो।
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