वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा है कि कर से जुड़े प्रस्तावों में देशहित को सबसे ऊपर रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कर दरों में कमी, छूट या रियायत की मांग से पहले राष्ट्रहित पर ध्यान दिया जाना चाहिए। वित्त मंत्री आज बेंगलुरु में इंटरनेशनल टैक्स रिसर्च एंड एनालिसिस फाउंडेशन द्वारा आयोजित दो दिन के सम्मेलन ‘न्यू एज टैक्सेशन’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रही थीं। निर्मला सीतारामन ने शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और थिंक टैंक से कर नीति पर स्वतंत्र शोध को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
सवाल सिर्फ़ यह नहीं होना चाहिए कि इस साल के बजट में हमारे क्षेत्र को क्या मिलेगा। बड़ा सवाल यह है कि अगले दो दशकों में भारत की टैक्स व्यवस्था कैसी होनी चाहिए, क्योंकि देश विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। इसके लिए टैक्स नीतियों पर बेहतर और व्यापक शोध की जरूरत है। साथ ही, जहां भी संभव हो, ऐसी नीतियों के व्यावहारिक विकल्प सामने आने चाहिए, जिन्हें वास्तव में लागू किया जा सके।
थल सेना अध्यक्ष (सीओएएस) जनरल धीरज सेठ ने आज नई दिल्ली में संयुक्त भारत-अर्जेंटीना सेना…
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन – डीआरडीओ ने अधिक ऊंचाई वाले ड्रॉप ज़ोन में से…
भारत ने काला सागर में वाणिज्यिक मालवाहक जहाज, एमवी रोयाड माम्मादोव पर हुए हमले की…
बेल्जियम में जन्मे वैज्ञानिक फ्रांसिस हाल्जेन को आइसक्यूब न्यूट्रिनो वेधशाला में योगदान और खगोलीय स्रोतों…
विश्व बैंक ने मौजूदा वित्त वर्ष में भारत के सकल घरेलू उत्पाद-जीडीपी वृद्धि दर का…
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को सरकार के मुखिया के रूप में…