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जनरल उपेंद्र द्विवेदी आज सेनाध्यक्ष (सीओएएस) के पद से सेवानिवृत्त हुए

जनरल उपेंद्र द्विवेदी, पीवीएसएम, एवीएसएम चार दशकों से अधिक की विशिष्ट सेवा के बाद आज सेनाध्यक्ष (सीओएएस) के पद से सेवानिवृत्त हो गए। उनके कार्यकाल को उच्च स्तर की सैन्य परिचालन तैयारी जारी रखने, सेना के तीनों अंगों के बीच समन्वय को मजबूत करने, परिवर्तन की प्रक्रिया को गति देने और प्रौद्योगिकी के समावेश, बल पुनर्गठन तथा सैनिकों पर केंद्रित पहलों को प्रोत्साहन के संबंध में विशेष ध्यान देने के लिए याद किया जाएगा।

सेना प्रमुख के रूप में जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने सभी मोर्चों पर परिचालन तत्परता को उच्च प्राथमिकता दी। भारतीय सेना ने उनके नेतृत्व में ऑपरेशन स्नो लेपर्ड के अंतर्गत उत्तरी सीमाओं पर दृढ़ और सतर्क रुख बनाए रखा और पश्चिमी मोर्चे पर दृढ़ संकल्प, संयम और पेशेवर रुख के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया। ऑपरेशन सिंदूर उनके कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण क्षण था जो उभरते सुरक्षा परिवेश में सेना की तत्परता, सटीकता और सुनियोजित प्रतिक्रिया को दर्शाता है।

जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना में परिवर्तन के दशक को सशक्त दिशा प्रदान की। उनके मार्गदर्शन में भारतीय सेना ने बल पुनर्गठन, आधुनिकीकरण, प्रौद्योगिकी के समावेश, सेना के तीनों अंगों में समन्वय, व्यवस्था और मानव संसाधन प्रबंधन में उल्लेखनीय सुधार किए। साथ ही, रुद्र ब्रिगेड, भैरव बटालियन, अश्नी ड्रोन प्लाटून, शक्तिबाण रेजिमेंट, दिव्यास्त्र बैटरी, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध ब्रिगेड और एकीकृत युद्ध समूह जैसी पहलों को आधुनिक, चुस्त और भविष्य के लिए तैयार बल के निर्माण के व्यापक प्रयास के अंतर्गत आगे बढ़ाया गया।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय पर भी जोर दिया। उन्होंने भविष्य के संयुक्त, एकीकृत और युद्धक्षेत्र-उन्मुख अभियानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए सेना, नौसेना और वायु सेना के बीच अधिक एकीकरण, समान परिचालन सोच और बेहतर समन्वय को लगातार प्रोत्साहन दिया।

उनके कार्यकाल के दौरान सेवारत कर्मियों, पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों का कल्याण प्रमुख प्राथमिकता बनी रही। उन्होंने सेना का अपने सैनिकों और पूर्व सैनिकों से जुड़ाव मजबूत करने के उद्देश्य से कई पहलें शुरू कीं जिनमें वेटरन्स अचीवर्स अवार्ड जैसी पहलों के माध्यम से उनके योगदान को सार्थक मान्यता देना शामिल है। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया कि सक्रिय सेवा के बाद भी सेना का अपने कर्मियों और उनके परिवारों के प्रति उत्तरदायित्व है।

जनरल द्विवेदी ने भारतीय सेना की भविष्य की तैयारियों के लिए विकसित भारत विजन @2047 और सशस्त्र बल विजन @2047 से प्रेरित दीर्घकालिक दृष्टिकोण प्रदान करने के उद्देश्य से सामरिक सुरक्षा दिशानिर्देश @ 2047 के निर्माण का भी मार्गदर्शन किया।

जनरल उपेंद्र द्विवेदी को अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक और अति विशिष्ट सेवा पदक जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है।

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