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government notified all six pillars of the second phase of the Semicon India Programme, with an outlay of ₹1.27 lakh crore
बिज़नेस भारत

सरकार ने एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये के व्‍यय के साथ सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम के दूसरे चरण के सभी छह स्तंभों को अधिसूचित किया

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज मीडिया को संबोधित करते हुए भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को अगले स्तर पर ले जाने के लिए सरकार के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। इस अवसर पर सेमीकॉन 2.0 योजना के सभी छह स्तंभों के लिए अधिसूचनाएं जारी की गईं, जो भारत की सेमीकंडक्टर डिजाइन और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह योजना पहले सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम से मिली गति को आगे बढ़ाती है और चिप डिजाइन, निर्माण और पैकेजिंग से लेकर उपकरण, सामग्री, अनुसंधान और विकास और प्रतिभा विकास तक सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला में वित्तीय और अवसंरचनात्मक सहायता प्रदान करती है।

इस योजना का उद्देश्य सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती बढ़ाकर और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में तकनीकी नेतृत्व स्थापित करके भारत की आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करना है। यह योजना 10 श्रेणियों को कवर करने वाले छह स्तंभों के माध्यम से संचालित होगी।

सेमीकॉन 2.0 के अंतर्गत छह मुख्य स्तंभ इस प्रकार हैं:

• स्तंभ 1 – डिज़ाइन

• स्तंभ 2 – मशीनें और सामग्री

• तीसरा स्तंभ – अधिक फैब स्थापित करना

• स्तंभ 4 – एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग को और अधिक सुदृढ़ बनाना

• स्तंभ 5 – अनुसंधान और विकास

• स्तंभ 6 – प्रतिभा विकास

स्तंभ 1 – डिजाइन: श्रेणियां: राष्ट्रीय महत्व और रणनीतिक प्राथमिकताओं के लिए सेमीकंडक्टर आईपी, चिप, सिस्टम-ऑन-चिप (एसओसी) और मॉड्यूल का डिजाइन; वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए सेमीकंडक्टर आईपी, चिप और एसओसी का डिजाइन; और तैनाती के लिए सेमीकंडक्टर आईपी/चिप्स/एसओसी के लिए तैनाती-लिंक्ड प्रोत्साहन (डीएलआई)।

स्तंभ 2 – मशीनें और सामग्री: श्रेणी: सेमीकंडक्टर विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र।

स्तंभ 3 – अधिक फैब की स्थापना: श्रेणियां: सिलिकॉन सेमीकंडक्टर वेफर फैब; कंपाउंड सेमीकंडक्टर/फोटोनिक्स/सेंसर (एमईएमएस सहित) फैब/डिस्क्रीट सेमीकंडक्टर फैब; और डिस्प्ले फैब।

स्तंभ 4 – एटीएमपी/ओएसएटी उद्योग को और मजबूत करना: श्रेणी: सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग (एटीएमपी) / आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी) सुविधा।

स्तंभ 5 – अनुसंधान और विकास: श्रेणी: उन्नत अर्धचालक प्रौद्योगिकियों के लिए अनुसंधान और विकास।

स्तंभ 6 – प्रतिभा विकास: श्रेणी: प्रतिभा विकास।

कार्यक्रम के दौरान अश्विनी वैष्णव ने कहा, “भारत ने 10 वर्षों में 85,000 सेमीकंडक्टर इंजीनियर तैयार करने का अपना लक्ष्य मात्र चार वर्षों में ही हासिल कर लिया है और अब एक लाख और इंजीनियर तैयार करने का नया लक्ष्य निर्धारित किया है। आने वाले वर्षों में वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग के बाजार का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा भारत में होने की उम्मीद है। टियर-2 और टियर-3 के शहरों के छात्रों ने पहले ही 250 से अधिक चिप डिजाइन कर लिए हैं। एक मामले में, शिलान्यास के मात्र 13 महीनों के भीतर ही वाणिज्यिक उत्पादन शुरू हो गया, जबकि कई मामलों में 200 दिन, 150 दिन और यहां तक ​​कि 90 दिनों के भीतर ही मंजूरी मिल गई। भारत में विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम से 50,000-60,000 प्रत्यक्ष रोजगार सृजित होने की भी उम्मीद है।”

सेमीकॉन 2.0 के तहत समर्थित परियोजनाओं की अवधि आम तौर पर छह वर्ष तक होगी, जबकि योजना शुरू में तीन वर्ष तक आवेदनों के लिए खुली रहेगी।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम) सेमीकॉन 2.0 के लिए नोडल एजेंसी होगी। यह आवेदन आमंत्रित करेगी, तकनीकी और वित्तीय मूल्यांकन करेगी, आवेदकों की सिफारिश करेगी और कार्यान्वयन की देखरेख करेगी। आईएसएम, सी-डीएसी की सहायता से डिजाइन और तैनाती श्रेणियों को लागू कर सकती है। मिशन 2026 से विशिष्ट नवाचार को बढ़ावा देने के लिए सेमीकंडक्टर डीप-टेक पुरस्कारों की घोषणा भी कर सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय वित्तीय सहायता के लिए बजटीय प्रावधान करेगा, और नोडल एजेंसी द्वारा अनुमोदित शर्तों के अनुसार भुगतान किया जाएगा। योजना के कार्यान्वयन के तीन वर्ष बाद, या आवश्यकतानुसार, मध्यावधि मूल्यांकन किया जाएगा ताकि योजना के प्रभाव का मूल्यांकन किया जा सके और संशोधनों या निरंतरता पर विचार किया जा सके।

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