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उत्तरी क्षेत्र में 89 गीगावॉट की अब तक की सर्वाधिक पीक डिमांड (अधिकतम मांग) 17 जून, 2024 को सफलतापूर्वक पूरी की गई: विद्युत मंत्रालय

भारत का उत्तरी क्षेत्र 17 मई, 2024 से जारी भीषण गर्मी के कारण विद्युत की बढ़ती मांग स्थितियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतीपूर्ण स्थितियों के बावजूद उत्तरी क्षेत्र में 89 गीगावॉट की अब तक की सर्वाधिक पीक डिमांड (अधिकतम मांग) 17 जून, 2024 को सफलतापूर्वक पूरी की गई। पीक डिमांड पूरी करने की यह उपलब्धि पड़ोसी क्षेत्रों से उत्तरी क्षेत्र की बिजली आवश्यकता का 25 से 30 प्रतिशत बिजली मंगाने से संभव हुई। सभी उपयोगिताओं को उच्च स्तर की सतर्कता बरतने और उपकरणों की बाध्यकारी रूप से बंदी को कम करने की सलाह दी गई है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, उत्तर-पश्चिम भारत में गर्मी की स्थिति 20 जून से कम होने की आशा है।

विद्युत मंत्रालय ने बढ़ती मांग को देखते हुए और देश भर में पर्याप्त बिजली उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए गर्मी के इस मौसम में 250 गीगावॉट की अधिकतम मांग को पूरा करने के लिए अनेक उपाय किए हैं। इन उपायों में शामिल हैं:

  1. आयातित कोयला आधारित (आईसीबी) संयंत्र परिचालन : आईसीबी संयंत्रों के लिए विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 11 के अंतर्गत निदेश जारी किए गए हैं ताकि वे उच्च मांग अवधि में उत्पादन समर्थन जारी रख सकें।
  2. रखरखाव निर्धारण: इस अवधि के दौरान उत्पादन इकाइयों का न्यूनतम नियोजित रखरखाव निर्धारित किया गया है। उत्पादन क्षमता की उपलब्धता को अधिकतम करने के लिए आंशिक और जबरन बंदी को न्यूनतम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, दीर्घावधि बंदी वाले संयंत्रों को अधिकतम विद्युत उत्पादन सुनिश्चित करने के लिए अपनी यूनिटों को फिर से चालू करने के लिए सुग्राही बनाया गया है।
  3. जेनको परामर्श: सभी उत्पादन कंपनियों (जीईएनसीओ) को सलाह दी गई है कि वे विभिन्न उत्पादन स्रोतों के अधिकतम संचालन में पूर्ण क्षमता उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने संयंत्रों को ठीक रखें।
  4. कोयला स्टॉक रखरखाव: कोयला आधारित थर्मल स्टेशनों पर पर्याप्त कोयला स्टॉक बनाए रखा जा रहा है।
  5. हाइड्रो स्टेशन सलाहकार : हाइड्रो स्टेशनों को सलाह दी गई है कि वे सौर घंटों के दौरान जल संरक्षण करें और हर समय बिजली पर्याप्तता सुनिश्चित करने के लिए गैर-सौर घंटों के दौरान अधिकतम उत्पादन भेजें।
  6. गैस आधारित बिजली संयंत्रों का संचालन: गैस आधारित बिजली संयंत्रों को विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 11 के अंतर्गत ग्रिड सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। इसके अतिरिक्त, लगभग 860 मेगावाट अतिरिक्त गैस-आधारित क्षमता (गैर-एनटीपीसी) को विशेष रूप से इस गर्मी के लिए प्रतिस्पर्धी बोली के माध्यम से जोड़ा गया है। इसके अतिरिक्त लगभग 5000 मेगावाट एनटीपीसी गैस आधारित क्षमता को सिस्टम आवश्यकताओं के अनुसार तत्काल संचालन के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है।
  7. अधिशेष बिजली का बाजार उपयोग: उत्पादन स्टेशनों के पास उपलब्ध किसी भी गैर-अपेक्षित या अधिशेष बिजली को बिजली (बिलंव भुगतान अधिभार और संबंधित मामले) नियम, 2022 और इसके संशोधनों के प्रावधानों के अनुसार बाजार में पेश किया जाना है। इस बिजली का उपयोग बिजली बाजार से कोई अन्य खरीदार कर सकता है।
  8. अंतर-राज्यीय बिजली बंधन: राज्य पीयूएसएचपी पोर्टल के माध्यम से अधिशेष क्षमता वाले अन्य राज्यों के साथ भी बिजली का गठजोड़ कर सकते हैं।
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