बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर गृह मंत्री अमित शाह ने आज लेह के जीवत्सल में तथागत बुद्ध के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। हमारे संवाददाता ने बताया है कि 75 वर्ष के बाद ये पवित्र अवशेष लद्दाख में वापस आए हैं।
यह पहली बार है कि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को देश के भीतर किसी प्रदर्शनी के लिए उनके स्थायी स्थान से दूसरे स्थान पर लाया गया है। प्रदर्शनी का उद्घाटन करने के बाद, अमित शाह ने बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर लद्दाख के लोगों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि लद्दाख में इन पवित्र अवशेषों की उपस्थिति याद दिलाती है कि भारत की सभ्यता ने हजारों वर्षों से शांति और सह-अस्तित्व का संदेश दिया है।
मुझे पूरा विश्वास है कि लद्दाख के कारगिल के सभी बुद्ध के अनुयायी और अन्य मतों के अनुयायी भी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों से दिव्य अनुभूति का एहसास करेंगे। आज यहां पर भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को लोगों के दर्शन के लिए खुला रखने का कार्यक्रम हो रहा है। आज ये एक प्रकार से धार्मिक आयोजन तो है ही, मगर एक ऐतिहासिक मिलन भी है।
लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा कि यह प्रदर्शनी दुनिया के हर कोने से धार्मिक नेताओं, भिक्षुओं, इतिहासकारों, विद्वानों, शोधकर्ताओं, तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और आम लोगों को एक मंच पर ला रही है। उद्घाटन समारोह बुद्ध पूर्णिमा के उत्सव के साथ हुआ। ये अवशेष उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले में स्थित पिपरहवा स्तूप में हुई खुदाई से प्राप्त हुए थे। आम जनता के दर्शन के लिए, ये पवित्र अवशेष कल से इस महीने की 10 तारीख तक लेह में रहेंगे और उसके बाद 11 और 12 मई को ज़ांस्कर घाटी में ले जाए जाएँगे। प्रदर्शनी के साथ-साथ, कई सांस्कृतिक और शैक्षणिक कार्यक्रम भी आयोजन किए जा रहे हैं।
इन पवित्र अवशेषों को देश के भीतर किसी प्रदर्शनी के लिए उनके स्थायी स्थान से बाहर पहली बार बाहर लाया गया है। पवित्र अवशेषों की यह प्रदर्शनी 14 मई तक लद्दाख में आयोजित की जाएगी।
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