केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।
अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। अमित शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।
अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। अमित शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।
अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।
अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।
अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।
अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। अमित शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। अमित शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।
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