प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत न केवल नई तकनीकों का विकास कर रहा है बल्कि उन्हें तेजी से अपना भी रहा है। नई दिल्ली के भारत मंडपम में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट का औपचारिक उद्घाटन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत विश्व का सबसे बड़ा तकनीकी केन्द्र है। उन्होंने कहा कि यह भारत और ग्लोबल साउथ के लिए गर्व का विषय है कि नई दिल्ली में एआई इम्पैक्ट समिट का आयोजन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से मानव इतिहास में क्रांतिकारी अध्याय जुड़ रहा है। उन्होंने कहा कि मानव इतिहास में कई ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ आए हैं, जिन्होंने पूरी शताब्दियों को आकार दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन बदलावों ने पूरी सभ्यता और विकास की गति को बदल दिया। उन्होंने कहा कि एआई से मशीनों की दक्षता बढ़ रही है, साथ ही मानवीय कार्यकुशलता भी कई गुना बढ़ गई है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि मशीन लर्निंग से लर्निंग मशीन तक का सफर न केवल तेज़ है बल्कि व्यापक भी है। इसलिए हमें व्यापक दूरदृष्टि रखते हुए गंभीरता से जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह विमर्श करना चाहिए कि वर्तमान पीढ़ी के साथ-साथ हमें अगली पीढ़ियों को किस प्रकार की एआई तकनीक सौंपनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने एआई के लोकतांत्रिकरण पर बल देते हुए कहा कि इसे विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के लिए समावेशन और सशक्तिकरण का साधन बनाना चाहिए।
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले साल फ्रांस और भारत की सह-मेजबानी में पेरिस में आयोजित एआई एक्शन समिट में इस तकनीक के लिए वैश्विक मार्गदर्शक सिद्धांत तय किये गए थे जो समाज और अर्थव्यवस्थाओं को बदल देंगे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस तेजी से नवाचार करने, स्वास्थ्य सेवा, ऊर्जा, परिवहन, कृषि और सार्वजनिक सेवाओं को सुगम बनाने और मानव कल्याण के लिए काम करने में सहायक होगी। राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि भारत ने कुछ ऐसा बनाया है जो दुनिया के किसी अन्य देश ने नहीं बनाया है। उन्होंने कहा कि 140 करोड़ लोगों के लिए डिजिटल पहचान, एक भुगतान प्रणाली जिसमें हर महीने 20 अरब का लेनदेन होता है और स्वास्थ्य अवसंरचना जिसके अंतर्गत 50 करोड़ डिजिटल स्वास्थ्य आईडी जारी की गई हैं।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा कि एआई सभी के लिए होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई का भविष्य कुछ ही देशों द्वारा तय नहीं किया जा सकता। एंटोनियो गुटेरेस ने विकासशील देशों में बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए एआई पर एक वैश्विक कोष बनाने का आह्वान किया।
शिखर सम्मेलन में विश्व नेताओं का स्वागत करते हुए केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि सरकार एआई स्टैक के सभी 5 स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार कंप्यूटिंग को जनहितैषी मानती है। उन्होंने बताया कि सरकार ने एक कॉमन कंप्यूट प्लेटफॉर्म बनाया है जो स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और छात्रों को किफायती दर पर 38 हजार जीपीयू उपलब्ध कराता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही इस प्लेटफॉर्म में 20 हजार जीपीयू और जोड़े जाएंगे। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक मूलभूत तकनीक है जो लोगों के काम करने, सीखने और निर्णय लेने के तरीके को बदल रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि प्रौद्योगिकी का वास्तविक मूल्य आम जनता तक इसके लाभों को पहुंचाना है।
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