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India rejected Nepal objection to the Kailash Mansarovar Yatra via the Lipulekh Pass, terming it unjustified.
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भारत ने लिपुलेख दर्रे से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर नेपाल की आपत्ति को खारिज करते हुए इसे अनुचित बताया

विदेश मंत्रालय ने कहा है कि लिपुलेख दर्रा 1954 से कैलाश मानसरोवर यात्रा का एक प्रमुख मार्ग रहा है और इस मार्ग से यात्रा दशकों से जारी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के संदर्भ में नेपाल के विदेश मंत्रालय की टिप्पणियों के संबंध में मीडिया के प्रश्नों का जवाब दिया। नेपाल के क्षेत्रीय दावों के संबंध में उन्होंने कहा कि भारत लगातार यह कहता रहा है कि ऐसे दावे न तो उचित हैं और न ही ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित हैं। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत द्विपक्षीय संबंधों के सभी मुद्दों पर नेपाल के साथ बातचीत के लिए तत्पर है।

इससे पहले नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल सरकार इस तथ्य पर पूरी तरह से स्पष्ट और दृढ़ है कि महाकाली नदी के पूर्व में स्थित लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी 1816 की सुगौली संधि के बाद से नेपाल के अभिन्न अंग हैं। नेपाल ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के संबंध में राजनयिक चैनलों के माध्यम से भारत और चीन को अपनी चिंता से अवगत कराया है।

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