भारत

राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और LBSNAA में 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा अधिकारियों ने राष्ट्रपति से भेंट की

राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज (2 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।

राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।

राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे समावेशी विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित राष्ट्र के रूप में भारत का रूपांतरण तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। उन्होंने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करने का आग्रह किया कि कोई भी समुदाय भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे न छूटे। उन्होंने स्थिरता और जलवायु लचीलापन को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में, उन्हें हरित प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहिए, जलवायु-अनुकूल शासन को प्रोत्साहित करना चाहिए और सतत विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।

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