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भारत और कनाडा ने द्विपक्षीय संबंधों को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण खनिज, नवीकरणीय ऊर्जा और सांस्कृतिक सहयोग पर समझौतों का आदान-प्रदान किया

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कॉर्नी ने आज नई दिल्‍ली में हैदराबाद हाउस में प्रतिनिधिमंडल स्‍तर की वार्ता की। इस दौरान भारत और कनाडा के बीच विभिन्न क्षेत्रों में तीन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। इनमें महत्वपूर्ण खनिज सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और सांस्कृतिक सहयोग शामिल हैं। बातचीत के बाद संयुक्‍त प्रेस वार्ता में प्रधानमंत्री ने कहा कि समझौतों से आपूर्ति श्रृंखला को मजबूती मिलेगी।

क्रिटिकल मिनरल्‍स पर आज हुआ एम ओ यू, रिजिलियन्‍स सप्‍लाई चेन को मजबूती देगा। स्‍पेस सेक्‍टर में हम दोनों देशों के स्‍टार्टअप और इंडस्‍ट्रीज को जोडेंगे। ऊर्जा के क्षेत्र में हम नेस्‍ट जनरेशन पार्टनरशिप बना रहे हैं। जिसमें हाइड्रो कार्बन के साथ–साथ रिन्‍यूबल एनर्जी, ग्रीन हाइड्रोजन और एनर्जी स्‍टोरेज पर विशेष बल दिया जाएगा। हमें खुशी है कि कनाडा ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस और ग्‍लोबल बॉयो फ्यूल एलायंस से जुड़ने का निर्णय लिया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब डॉलर तक बढ़ाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। हमारा लक्ष्‍य है कि 2030 तक हमारा व्‍यापार, 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचे। आर्थिक सहयोग का पूरा पोंटेशियल अनलॉक करना, यह हमारी प्राथमिकता है। इसलिए हमने काम्प्रिहेन्सिव इक्‍नॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट को जल्‍द ही फाइनलाइज करने का निर्णय लिया है। इससे दोनों देशों में निवेश और रोजगार के नए अवसर बनेंगे।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि कनाडा भारत के साथ अपने संबंधों को नवीनीकृत और विस्तारित कर रहा है। इससे पहले आज सुबह, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने नई दिल्ली में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी से मुलाकात की। एक सोशल मीडिया पोस्ट में, डॉ. जयशंकर ने भविष्योन्मुखी साझेदारी की रूपरेखा तैयार करने के लिए उनकी प्रतिबद्धता की सराहना की। बाद में प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री कार्नी भी भारत-कनाडा सीईओ फोरम में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में संघर्ष पर गहरी चिंता व्‍यक्‍त की है। उन्‍होंने कहा कि भारत, संवाद और कूटनीति के माध्यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है।

पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति हमारे लिए गहरी चिंता का विषय है। भारत डॉयलाग और डिप्‍लोमेसी के माध्‍यम से सभी विवादों के समाधान का समर्थन करता है। इस क्षेत्र में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की सुरक्षा के लिए, हम सभी देशों के साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ न केवल दोनों देशों के लिए बल्कि पूरी मानवता के लिए गंभीर चुनौती हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए इसके खिलाफ दोनों देशों का घनिष्ठ सहयोग अत्यंत आवश्यक है।

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