देश में रेल नेटवर्क और क्षेत्रीय संपर्क मजबूत करने के लिए भारतीय रेल ने तीसरी लाइन के निर्माण, दोहरीकरण और बाईपास अलाइनमेंट (भीडभाड वाले रेल यातायात मार्ग को वैकल्पिक उपमार्ग से गुजारने की योजना) सहित कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इनका लक्ष्य परिचालन दक्षता और यात्री सुरक्षा बढ़ाना, यात्रा समय में कमी लाना और आम लोगों को सुगमता प्रदान करना है। इससे आर्थिक विकास और महत्वपूर्ण रेल मार्ग पर सुचारू आवागमन सुनिश्चित होगा।
भारतीय रेल ने उत्तर पूर्वी रेलवे के अंतर्गत औड़िहार –वाराणसी नगर के बीच समर्पित तीसरी लाइन के निर्माण को स्वीकृति दी है। इस व्यस्त खंड पर अभी काफी यात्री और माल ढुलाई संचालित होती है। इनमें सीमेंट, कोयला, खाद्यान्न, लोहा, इस्पात और औद्योगिक सामग्री जैसी आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। तीसरी लाइन के निर्माण से प्रतिदिन दोनो दिशाओं से सात से अधिक अतिरिक्त रेलगाड़ी चल सकेगी और माल ढुलाई में वार्षिक स्तर पर 1.99 मीट्रिक टन की वृद्धि होगी। इससे समग्र नेटवर्क परिचालन बढ़ेगा। योजना पूर्ण होने पर, लाइन की वर्तमान क्षमता मौजूदा 87.93 प्रतिशत से बढ़कर 102 प्रतिशत से अधिक हो जाएगी, जिससे भीड़भाड़ में काफी कमी आएगी, ट्रेनों की समयबद्धता में सुधार होगा और लाखों यात्रियों की यात्रा सुगम होगी। यह उन्नयन स्थानीय उद्योगों के लिए साजो-सामान लाने की सुविधा और पूर्वी उत्तर प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में व्यापारिक गलियारे को सुदृढ़ बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे के अंतर्गत राजस्थान में रींगस-सीकर रेलखंड के दोहरीकरण से इस महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मार्ग की क्षमता में काफी सुधार होगा। प्रतिदिन दोनों दिशाओं में पांच अतिरिक्त ट्रेनों के परिचालन और माल ढुलाई में 2.36 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की वृद्धि के साथ, यह परियोजना यात्री और माल ढुलाई दोनों सेवाओं में विश्वसनीयता और गति में सुधार लाएगी। इससे परिचालन दक्षता में वृद्धि के साथ ही राजस्थान के औद्योगिक और तीर्थ क्षेत्रों तक संपर्क सुविधा बढ़ेगी, जिसमें खाटू श्यामजी (सीकर) और सालासर बालाजी (चूरू) जैसे स्थलों तक पहुंचना और भी सुगम हो जाएगा। अभी इस रेलखंड की 77 प्रतिशत क्षमता का उपयोग हो रहा है, जिसके 2029-30 तक बढ़कर 210 प्रतिशत होने की संभावना है। दोहरीकरण से यह रेलखंड भविष्य में यातायात बढ़ोतरी को सुचारू तौर पर संभाल सकेगा। स्थानीय यात्री और व्यवसाय भी इस रेलखंड दोहरीकरण से लाभान्वित होंगे। इससे विलंब में कमी और समय पर रेल सेवा तथा माल ढुलाई में सुधार होगा, जिससे क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा मिलेगा।
पश्चिमी रेलवे के अंतर्गत उज्जैन बाईपास लाइन परियोजना से वैकल्पिक उपमार्ग उपलब्ध होगा जिससे उज्जैन जंक्शन पर रेलगाड़ियों को वापस मोड़ने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और खंड की क्षमता और परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार होगा। यह रेल गलियारा धार्मिक और पर्यटन यातायात को सुगम बनाएगा, विशेष रूप से वर्ष 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले को देखते हुए, इससे महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग और अन्य पूजनीय स्थलों पर जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए निर्बाध रेल आवागमन सुनिश्चित होगा। रेलगाड़ियों को वापस मोड़ने की आवश्यकता न होने से विलंब कम होगा और समय सारिणी की विश्वसनीयता सुधरेगी। विशेष रूप से अत्यधिक भीडभाड वाले त्योहारों के समय यह लोगो के लिए काफी सुविधाजनक साबित होगा। इस परियोजना से दैनिक यात्री और माल ढुलाई सेवाओं का सुचारू संचालन भी सुनिश्चित होगा और मौजूदा तथा भविष्य दोनों ही मांग पूरी होगी। रेल-उपमार्ग से स्थानीय लोगों, दैनिक यात्रियों और तीर्थयात्रियों को तेज रेल परिवहन और बेहतर सेवा का लाभ मिलेगा।
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