यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड’ एशिया और प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में अब भारत की कुल छह रचनाएं हो गई हैं। भारत की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत की प्रमुख तीन कृतियों- कल्हण की ‘राजतरंगिणी’, ‘महाभारत’ और कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र’ को भी अब इस सूची में शामिल कर लिया गया है। इंडोनेशिया के जकार्ता में हुई 11वीं बैठक में यह फैसला लिया गया। इन तीनों पुस्तकों के शामिल होने के बाद इस सूची में भारत की कुल छह रचनाएं हो गई हैं। ‘राजतरंगिणी’ में कश्मीर के इतिहास का वर्णन है और ‘महाभारत’ में धर्म, कर्तव्य तथा मानवीय मूल्यों की बात कही गई है। वहीं, ‘अर्थशास्त्र’ में शासन व्यवस्था, कूटनीति और राज्य संचालन के बारे में बताया गया है। इसकी जानकारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने दी। उन्होंने इन तीनों पुस्तकों को सूची में शामिल कराने के लिए नामांकन से जुड़े दस्तावेज तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।





