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India space economy will grow from the current US$ 8-9 billion to approximately US$ 40-45 billion over the next decade Dr. Jitendra Singh.
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भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले दशक में वर्तमान 8-9 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 40-45 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी: डॉ. जितेंद्र सिंह

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि नीतिगत सुधारों, बढ़ती निजी भागीदारी और तेजी से हो रहे नवाचार के कारण भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था अगले दशक में वर्तमान 8-9 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर लगभग 40-45 बिलियन अमेरिकी डॉलर हो जाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यहां एक प्रेस सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र में हो रहा परिवर्तन पूरे देश में हो रहे एक व्यापक बदलाव को दर्शाता है, जहां विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर राष्ट्रीय चेतना का हिस्सा बन गए हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक विज्ञान और समाज के बीच बढ़ता जुड़ाव है। इसमें नागरिक खुद को भारत की वैज्ञानिक प्रगति में भागीदार के रूप में देख रहे हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, “सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि आज आम नागरिक भारत की वैज्ञानिक प्रगति से जुड़ाव महसूस करता है और उसमें अपनी हिस्सेदारी देखता है।”

मंत्री जी ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का बढ़ता महत्व प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की दूरदृष्टि को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधनों के माध्यम से विज्ञान आधारित पहलों को लगातार राष्ट्रीय मुख्यधारा में शामिल किया। उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत, डिजिटल इंडिया, डिजिटल हेल्थ, डीप ओशन मिशन और गगनयान जैसे कार्यक्रमों ने भारत के विकास पथ के केंद्र में विज्ञान और नवाचार को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

डॉ. जितेंद्र सिंह के अनुसार, विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों में मुख्यधारा मीडिया की बढ़ती उपस्थिति स्वयं वैज्ञानिक विकास में बढ़ती जनता की रूचि को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 जैसे मिशनों ने अंतरिक्ष विज्ञान को जनता की रूचि का विषय बना दिया है। इससे देश भर के नागरिकों में अभूतपूर्व जागरूकता और भागीदारी उत्‍पन्‍न हुई है।

मंत्री जी ने कहा कि अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और उन्नत प्रौद्योगिकी जैसे अग्रणी क्षेत्रों में भारत की बढ़ती क्षमताओं से देश की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है। उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों से उत्पन्न विश्वास ने स्वदेशी प्रौद्योगिकियों की विश्वसनीयता को बढ़ाया है और एक विश्वसनीय प्रौद्योगिकी भागीदार के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ किया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हाल की तकनीकी उपलब्धियों ने उभरते क्षेत्रों में भारत की उत्कृष्टता को प्रदर्शित किया है। उन्नत प्रौद्योगिकियां रणनीतिक और आर्थिक परिणामों को तेजी से प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय प्रौद्योगिकियों और उत्पादों की बढ़ती स्वीकार्यता देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं की मजबूती को दर्शाती है।

मंत्री जी ने अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों के प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए कहा कि कुछ साल पहले तक भारत में मुट्ठी भर ही अंतरिक्ष स्टार्टअप थे, लेकिन आज यहां 400 से अधिक अंतरिक्ष स्टार्टअप हैं जो एक जीवंत और तेजी से विकसित हो रहे पारिस्थितिकी तंत्र में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत कम समय में प्राप्‍त वृद्धि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था की अपार क्षमता को दर्शाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि चंद्रयान-3 और आगामी गगनयान कार्यक्रम जैसे मिशनों में भारत की उपलब्धियों ने देश को विश्व के अग्रणी अंतरिक्ष-यात्री देशों में स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने लगातार दक्षता, नवाचार और कम लागत से जटिल मिशनों को पूरा करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है।

मंत्री जी ने कहा कि भारत की विशेष शक्तियों में से एक शासन और विकास के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का व्यापक उपयोग है। उन्होंने कहा कि देश ने अंतरिक्ष आधारित अनुप्रयोगों को अवसंरचना नियोजन, परियोजना की निगरानी और सार्वजनिक सेवा में इस पैमाने पर सफलतापूर्वक एक किया है जो शायद ही कहीं और देखने को मिलता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पीएम गति शक्ति जैसी पहलें, शहरी विकास कार्यक्रम और ड्रोन-आधारित निगरानी प्रणालियां यह दर्शाती हैं कि अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी विकास परियोजनाओं की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में सुधार करने के साथ-साथ पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में कैसे सहायता कर रही है।

मंत्री जी ने कहा कि प्रत्येक प्रमुख अंतरिक्ष कार्यक्रम निरंतर सीखने और सुधार से विकसित होता है। मिशनों के दौरान आने वाली चुनौतियाँ मजबूत प्रणालियों, बेहतर तैयारियों और भविष्य के अधिक सुदृढ़ मिशनों में योगदान देती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंतरिक्ष अभियानों में आने वाली अस्थायी असफलताओं को वैज्ञानिक प्रगति और तकनीकी विकास के व्यापक संदर्भ में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष क्षेत्र में अग्रणी शक्तियों के मुकाबले भारत का समग्र रिकॉर्ड काफी अच्छा है और उन्‍होंने चंद्रयान और मंगल मिशन की पहले ही प्रयास में मिली सफलताओं को देश की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमताओं उदाहरण बताया।

मंत्री जी ने कहा कि हाल ही में हुए पीएसएलवी मिशन की गति-विरोध का विश्लेषण पूरा हो चुका है और इसके मूल कारणों की पहचान कर ली गई है। सुधारात्मक उपाय पहले ही शुरू कर दिए गए हैं और भविष्य के मिशन इन अनुभवों से लाभान्वित होंगे, जिससे भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम और मजबूत होगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियां आर्थिक विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लगातार योगदान दे रही हैं। उन्होंने कहा कि स्टार्टअप, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों की बढ़ती भागीदारी एक मजबूत नवाचार तंत्र का निर्माण कर रही है जो विकसित भारत 2047 की परिकल्‍पना को साकार करने में सक्षम है।

मंत्री जी “विकसित भारत 2047 के लिए नवाचार और उद्यमिता आधारित विकास” विषय पर आयोजित राइज कॉन्क्लेव 2026 के दौरान मीडिया से बात कर रहे थे। इस सम्मेलन में शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत के प्रमुख, निवेशक और नीति निर्माता एक साथ आए ताकि नवाचार तंत्र में सहयोग को मजबूत किया जा सके और वैज्ञानिक अनुसंधान को सामाजिक और आर्थिक परिणामों में बदलने की प्रक्रिया को गति दी जा सके। इस कार्यक्रम में 125 से अधिक स्टार्टअप्स और प्रौद्योगिकी नवोन्मेषकों ने भाग लिया। इसमें उन्‍होंने एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डीप-टेक और कृषि-खाद्य नवाचार के क्षेत्र में अपने समाधानों का प्रदर्शन किया। चर्चा का मुख्य केंद्र अनुसंधान-उद्योग साझेदारी को मजबूत करना और नवाचार-आधारित विकास को आगे बढ़ाना था।

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