इस्राएल के प्रधानमंत्री बेन्यामिन नेतन्याहू ने लेबनान के साथ सीधी बातचीत को मंजूरी दे दी है। इन वार्ताओं का उद्देश्य ईरान समर्थित हिजबुल्लाह को निरस्त्र करना और दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य बनाने की संभावनाओं को तलाशना है। बेन्यामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इस्राएल और लेबनान के बीच कोई संघर्ष विराम नहीं है। उन्होंने कहा कि इस्राएल की सेना उत्तरी इस्राएल में सुरक्षा बहाल होने तक हिजबुल्लाह के खिलाफ अभियान जारी रखेगी।
इस्राएल ने पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ की टिप्पणियों की भी कड़ी आलोचना की है। इस्राएल ने उनकी टिप्पणी को अत्यंत आपत्तिजनक बताया और पश्चिम एशिया में जारी तनाव में एक तटस्थ मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। इस्राएल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी इन बयानों की निंदा करते हुए उन्हें स्पष्ट यहूदी–विरोधी बताया।
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा कि संघर्ष विराम स्वीकार करने का निर्णय देश के नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मित से लिया गया है। इसे सर्वोच्च नेता ने स्वीकृति दी है। उन्होंने इस कदम को कमजोरी के बजाए एक रणनीतिक कदम बताया।
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