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नाबार्ड द्वारा विकसित आरएसवीसी-अमृत प्लेटफॉर्म का शुभारंभ

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने 15 अगस्त 2025 को, 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, आरएसवीसी एएमआरआईटी प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया, जो प्रौद्योगिकी आधारित ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (ओपीएसए) के सहयोग से नाबार्ड द्वारा विकसित, एएमआरआईटी, रूटेज स्मार्ट विलेज सेंटर (आरएसवीसी) इकोसिस्टम की डिजिटल रीढ़ के रूप में कार्य करता है, ग्रामीण नवाचार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण का समर्थन करता है और ग्रामीण क्षेत्रों में उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को वृहद रूप से अपनाने में सक्षम बनाता है। समारोह के शुभारंभ में नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी., विभिन्न संगठनों और हितधारक समूहों के प्रतिनिधियों के साथ उपस्थित हुए।

प्रो. सूद ने अपने संबोधन में इस बात पर ज़ोर दिया कि एएमआरआईटी को एक व्यापक डिजिटल इकोसिस्टम के रूप में डिज़ाइन किया गया है जो प्रौद्योगिकी की खोज और सत्यापन से लेकर तैनाती ट्रैकिंग, सहयोग, निगरानी और ज्ञान प्रबंधन तक, संपूर्ण आरएसवीसी जीवनचक्र का समर्थन करता है। उन्होंने कहा कि यह प्लेटफॉर्म धीरे-धीरे नवप्रवर्तकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं, स्टार्टअप्स, सत्यापनकर्ताओं, एक्सेलरेटरों, कार्यान्वयन भागीदारों, वित्तपोषण एजेंसियों, शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण समुदायों को एक साझा मंच पर एकजुट करेगा। इन हितधारकों को जोड़कर, एएमआरआईटी से ग्रामीण क्षेत्रों में सहयोग को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकियों के प्रसार में तेजी लाने की आशा है, जिससे प्रौद्योगिकी और नवाचार को अंतिम बिन्‍दु तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

इस मंच की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए डॉ. कृष्णन ने कहा कि भारत में वैज्ञानिक संस्थानों, नवप्रवर्तकों, स्टार्टअप्स और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं का समृद्ध इकोसिस्‍टम होने के बावजूद, ग्रामीण जरूरतों के साथ उपयुक्त प्रौद्योगिकियों को जोड़ना एक चुनौती बना हुआ है। अमृत ग्रामीण जरूरतों को नवाचारों, संस्थानों और कार्यान्वयन तंत्रों से जोड़कर, जमीनी स्तर पर प्रौद्योगिकी के प्रसार और अपनाने को मजबूत करके इस अंतर को पाटने का प्रयास करता है। उन्होंने वर्तमान में समर्थित 8 आरएसवीसी के अलावा, देश भर में ऐसे उद्यमों को समर्थन देने के लिए नाबार्ड की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

आरएसवीसी की पहल कृषि, ग्रामीण उद्यम, नवीकरणीय ऊर्जा, शिक्षा, सहायक प्रौद्योगिकियां, जल एवं स्वच्छता तथा नागरिक सेवाएं जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए, ग्राम-स्तरीय प्रौद्योगिकी केंद्रों के माध्यम से अनुसंधान संस्थानों, नवप्रवर्तकों और स्टार्टअप्स से ग्रामीण समुदायों तक उपयुक्त और किफायती प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण को सुगम बनाती है। एएमआरआईटी इस भौतिक पहुंच को और आगे बढ़ाते हुए इकोसिस्‍टम में एक डिजिटल परत जोड़ता है, और नाबार्ड को उम्मीद है कि यह ग्रामीण नवाचारों, प्रौद्योगिकियों, सर्वोत्तम प्रथाओं और सहयोग के अवसरों के राष्ट्रीय भंडार के रूप में विकसित होगा, जो व्यापक प्रौद्योगिकी अपनाने और विकसित भारत 2047 के विजन का समर्थन करेगा।

यह पहल नाबार्ड के ओपीएसए और एनएबी फाउंडेशन (नाबार्ड की सहायक कंपनी) के साथ पहले हुए त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन और मुंबई स्थित मुख्यालय में आरएसवीसी (सार्वजनिक हितधारक सामुदायिक सेवा केंद्र) की स्थापना पर आधारित है। इस अवसर पर, नाबार्ड ने आरएसवीसी की स्थापना के लिए अपनी योजना की व्यापक रूपरेखा साझा की, जिसे नाबार्ड द्वारा समर्थित किया जाएगा और कॉरपोरेट्स के सहयोग से सीएसआर (संसाधन-आधारित) पहलों के माध्यम से स्थापित किया जाएगा, जिसमें एनएबी फाउंडेशन कार्यान्वयन भागीदार के रूप में कार्य करेगा।

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