अमरीका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो की मेजबानी में लेबनान और इस्राएल ने मंगलवार को वाशिंगटन में प्रारंभिक प्रत्यक्ष वार्ता की। यह बैठक 1980 के दशक की शुरुआत के बाद दोनों देशों के बीच पहली प्रत्यक्ष राजनयिक बातचीत है। रिपोर्टों के अनुसार, वार्ता सुरक्षा व्यवस्था और नागरिक मुद्दों पर केंद्रित थी। वार्ता में इस्राएल की सैन्य गतिविधि और विवादित क्षेत्रों से लेबनान की वापसी की मांग शामिल थी। इस्राएल ने समझौते में हिज़्बुल्लाह की सैन्य उपस्थिति पर भी ध्यान देने पर बल दिया है। लेबनान के अधिकारियों ने हिज़्बुल्लाह के संबंध में अपने प्रतिनिधिमंडल के बयानों की सार्वजनिक रूप से पुष्टि नहीं की है। वहीं हिज़्बुल्लाह ने वार्ता का विरोध किया है।
पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए राजनयिक प्रयास तेज कर दिए गए हैं। इसके लिए अमरीका दो प्रमुख मोर्चों पर बातचीत को आगे बढ़ा रहा है। अमरीका का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत कुछ दिनों में फिर शुरू हो सकती है, क्योंकि दोनों पक्ष युद्धविराम को बढ़ाने और होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में तनाव कम करने का प्रयास कर रहे हैं। दूसरी ओर इस्राएल और लेबनान भी दशकों बाद पहली बार वार्ता कर रहे हैं। अमरीका में हो रही बातचीत के केन्द्र में सीमा पर तनाव और दक्षिणी लेबनान में सुरक्षा व्यवस्था है। अमरीका, पश्चिम एशिया में कई तनावग्रस्त क्षेत्रों में स्थिरता के प्रयासों के अन्तर्गत दोनों मोर्चों पर मध्यस्थता कर रहा है। हालांकि तत्काल किसी बड़ी सफलता की उम्मीद नहीं है, लेकिन अमरीका-ईरान और इज़राइल-लेबनान के बीच एक साथ चल रही कूटनीतिक वार्ता इस व्यापक संघर्ष को पूरे क्षेत्र में फैलने से रोकने के लिए नए प्रयासों का संकेत है।
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