लोकसभा ने वर्ष 2024-25 के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से संबंधित अनुदान मांगों को चर्चा के बाद मंजूरी दे दी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि मोदी सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बजटीय आवंटन 2013-14 के 33 हजार 278 करोड़ रुपये से बढ़कर 2024-25 में 90 हजार 958 करोड़ रुपये हो गया है। इसमें 164 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बताया कि कुल बजट में से 55 प्रतिशत राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से खर्च की जाती है. उन्होंने यह भी बताया कि सरकार धीरे-धीरे स्वास्थ्य बजट बढ़ा रही है। वर्तमान में यह सकल घरलू उत्पाद के 1 दशमलव 9 प्रतिशत तक पहुंच गया है। जगत प्रकाश नड्डा ने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत, मुफ्त दवा तथा निदान सेवा और मुफ्त जांच के कार्यान्वयन के कारण रोगी के अपनी जेब से किये जाने वाले 62 प्रतिशत खर्च से घटकर 47 दशमलव 1 प्रतिशत हो गया है।
प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल और तृतीयक स्वास्थ्य देखभाल केंद्र के बुनियादी ढांचे के बारे में स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कुल 22 एम्स स्वीकृत किए गए थे, जिनमें से 18 चालू हैं और चार निर्माणाधीन हैं। जगत प्रकाश नड्डा ने आगे बताया कि सरकार मरीजों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना लागू कर रही है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के तहत जन औषधि केंद्रों के कुल 13 हजार आउटलेट चालू हैं और मोदी सरकार ने अगले पांच वर्षों में ऐसे 25 हजार और केंद्र खोलने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट 2024-25 में की गई पहल का दूरगामी प्रभाव पड़ेगा।
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