लद्दाख में आज नव वर्ष के अवसर पर लद्दाख लोसर उत्सव मनाया जा रहा है। उपराज्यपाल रविन्द्र गुप्ता ने लोसर के अवसर पर लद्दाख के लोगों को शुभकामनाएं दी हैं और सभी के लिए शांति, समृद्धि और समरसता की कामना की।
लोसर लद्दाख का प्रमुख धार्मिक त्योहार है, जो सर्दियों में मनाया जाता है। इसमें, आने वाले वर्ष में पशुपालन से समृद्धि, अच्छी फसल और धन की कामना की जाती है। तिब्बती भाषा में “लोसर” का अर्थ है नया साल। यह नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह त्योहार मुख्य रूप से तिब्बत, लद्दाख, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, नेपाल और भूटान में मनाया जाता है। लोसर की पूर्व संध्या पर कल दीये जलाए गए।
इस अवसर पर इमारतें, घर, मठ, स्तूप जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थान और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान रोशनी से जगमगा उठे। लोसर का उत्सव नए साल से नौ दिनों तक चलता है। इसमें देवी देवताओं की पूजा की जाती हैं, आइबेक्स के सम्मान में नृत्य और गीत गाए जाते हैं और माउंट कैलाश की तीर्थयात्रा की जाती है। नए साल का स्वागत आइबेक्स, सूरज और चाँद के आटे के मुर्तियों और रसोई की दीवारों पर आटे से बने शुभ चिह्नों से किया जाता है।
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