फसलों की कटाई का पर्व मकर संक्रांति आज देश के विभिन्न भागों में मनाया जा रहा है। मकर संक्रांति का पर्व हेमंत ऋतु के समापन और शिशिर ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इसी दिन से दिवस की अवधि बढने लगती है। इस त्यौहार को देश के विभिन्न भागों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। तमिलनाडु में इसे पोंगल, गुजरात में उत्तरायण, असम में भोगाली बिहू और पश्चिम बंगाल में पौष संक्रांति के रूप में इसे मनाया जाता है।
प्रयागराज में महाकुंभ में मकर संक्रांति पर्व पर प्रथम अमृत स्नान जारी है। 13 अखाड़ों में से प्रत्येक अखाड़े को उसके निर्धारित समय और क्रम की सूचना दे दी गई है। महानिर्वाणी पंचायती अखाड़े को त्रिवेणी संगम पर सबसे पहले और श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल को अंत में अमृत स्नान का क्रम निर्धारित किया गया है। इस भव्य आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। कल पौष पूर्णिमा पर दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भव्य समागम में एक करोड़ पचास लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाई। हेलीकॉप्टर से श्रद्धालुओं पर पुष्प वर्षा की गई। महाकुंभ 26 फरवरी को महाशिवरात्रि तक चलेगा।
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