कोयला मंत्रालय ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ बनाने और आर्थिक विकास को गति देने में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए दामोदर घाटी निगम-डीवीसी के साथ तीन वाणिज्यिक कोयला खंडों – धुलिया नॉर्थ, मंदाकिनी बी और पीरपैंती बरहट में कोयला खान के विकास और उत्पादन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी के 13वें दौर में इन खंड़ो की नीलामी हुई थी।
इन समझौतों का क्रियान्वयन कोयला क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण है। तीनों कोयला खंडों का अन्वेषण हो चुका है और इनकी संयुक्त उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष 49 मिलियन टन है, जो देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताएं पूरी करने में अहम योगदान देगा।
इन परियोजनाओं से सालाना लगभग 4,621 करोड़ रुपये का राजस्व और लगभग 7,350 करोड़ रुपये का पूंजी निवेश आकर्षित होगा। इससे आर्थिक गतिविधियों और औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।
इन कोयला खंडों के विकास से ऊर्जा उपलब्धता बढ़ने के साथ ही सामाजिक-आर्थिक लाभ की संभावना है। अनुमान है कि इन तीन परियोजनाओं से लगभग 66,248 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होंगे जिससे कोयला उत्पादन क्षेत्रों में आजीविका सृजन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।
कोयला मंत्रालय पारदर्शी, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-हितैषी नीलामी ढांचे द्वारा कोयले का घरेलू उत्पादन बढ़ाने को दृढ़ संकल्पित है। इन प्रयासों का उद्देश्य दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना, आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और आत्मनिर्भर भारत की राष्ट्रीय दृष्टियोजना के अनुरूप समावेशी विकास करना है।
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