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खान मंत्रालय ने महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग पर अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

खान मंत्रालय ने आज महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग के लिए अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। यह वर्तमान सहयोग भारत को महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में विश्वसनीय डेटा, विश्लेषण और नीतिगत सिफारिशों तक पहुंच प्रदान करेगा, जिससे इसकी निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी और रणनीतिक संसाधन प्रबंधन सुनिश्चित होगा। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) के फ्रेमवर्क के अधीन काम करने वाला एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है।

यह सहयोग भारत को महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में अपनी नीतियों, विनियमनों और निवेश णनीतियों को सुव्यवस्थित करने में सक्षम बनाएगा और उन्हें वैश्विक मानकों और सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ संरेखित करेगा। अन्य आईईए सदस्य देशों और संबद्ध देशों के अनुभवों से सीखकर, भारत टिकाऊ और लचीली ऊर्जा प्रणालियों की दिशा में अपनी प्रगति को और गति दे सकता है।

आईईए के साथ किया गया यह समझौता ज्ञापन भारत और आईईए सदस्य देशों के बीच क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान को भी सुगम बनाएगा। डेटा संग्रह, मॉडलिंग और विश्लेषण पर सहयोग से महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में भारत की तकनीकी क्षमताओं और संस्थागत क्षमताओं में बेहतरी होगी। इसके अलावा, इस समझौता ज्ञापन के तहत किए गए संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं, कार्यशालाएं और प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण खनिजों के लिए प्रौद्योगिकी विकास, निष्कर्षण तकनीकों और पुनर्चक्रण विधियों में सहयोग और नवाचार को बढ़ावा देने में मदद करेंगे।

आईईए और भारत सरकार, खान मंत्रालय के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करने के इस प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा 3 अक्टूबर 2024 को मंजूरी दी गई थी। समझौता ज्ञापन पर खान मंत्रालय के सचिव वी.एल. कांता राव और आईईए के कार्यकारी निदेशक डॉ. फतिह बिरोल ने हस्ताक्षर किए हैं।

आज शास्त्री भवन, नई दिल्ली में केंद्रीय खान मंत्री जी. किशन रेड्डी और खान मंत्रालय के सचिव वी.एल. कांता राव की गरिमामयी उपस्थिति में खान मंत्रालय के संयुक्त सचिव विवेक कुमार बाजपेयी और आईईए के ऊर्जा खनिज विश्लेषण प्रमुख ताए-यूं किम के बीच इस समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया गया।

यह सहयोग भारत के महत्वपूर्ण खनिज संसाधनों को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, साथ ही ये महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्र में वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भी है।

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