अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना के तहत आईआईटी पटना के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने भविष्य अनुरूप कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना – प्रधानमंत्री विकास के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना (आईआईटी), के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की निदेशक नेहा गिरी, आईआईटी पटना के निदेशक प्रोफेसर टीएन सिंह और दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किए गए।
इस विशेष सहयोग के तहत, बिहार के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को एआई टेक्नोक्रेट और बिजनेस एनालिटिक्स एग्जीक्यूटिव जैसे उभरते और उच्च मांग वाले रोजगार पदों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को बाजार की सामयिक आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योग-संबंधी कौशल प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक कौशल प्रदान कर अल्पसंख्यक युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें रोजगार के अवसर सुलभ कराना है। यह प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना-पीएम विकास योजना का मूल उद्देश्य रेखांकित करता है। इसका लक्ष्य कौशल अंतर में कमी लाकर और समकालीन प्रशिक्षण द्वारा स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है। आईआईटी पटना जैसे प्रमुख संस्थान के साथ साझेदारी कर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय लाभार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योग अनुभव और बेहतर कैरियर परिणाम सुनिश्चित करना चाहता है, जिससे समावेशी विकास और सशक्तिकरण में योगदान हो।
यह सहयोग पीएम विकास योजना के तहत मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को आगे बढ़ाता है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने गुणवत्तापूर्ण, उद्योग-उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थानों के अपने नेटवर्क का विस्तार करते हुए पिछले सप्ताह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़; राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर; वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुर; और अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे।





