भारत

राष्ट्रीय डिजिटल अवसंरचना के सह-निर्माण के लिए डिजिटल इंडिया भाषिणी और काठमांडू यूनिवर्सिटी के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार के डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) ने भारत तथा नेपाल में भाषा एआई, बहुभाषी डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और समावेशी डिजिटल पारितंत्रों को आगे बढ़ाने के लिए एक सहयोगात्मक ढांचा स्थापित करने हेतु नेपाल की काठमांडू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (डीपीआई-एआई) के साथ एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए हैं।

एमओयू पर डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग और काठमांडू यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डीन, प्रोफेसर बाल कृष्ण बाल ने हस्ताक्षर किए।

एमओयू का आदान-प्रदान नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय बैठकों के दौरान भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल की उपस्थिति में किया गया। यह अवसर उभरती प्रौद्योगिकियों, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तथा समावेशी डिजिटल रूपांतरण के क्षेत्र में सहयोग को सुदृढ़ करने के प्रति भारत और नेपाल की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

यह साझेदारी समावेशी विकास, सामाजिक सशक्‍तीकरण और क्षेत्रीय सहयोग के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग को लेकर भारत और नेपाल के साझा विज़न को प्रतिबिंबित करती है। यह एमओयू केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे लोगों के बीच संपर्क को सुदृढ़ करने, भाषाई विरासत के संरक्षण को बढ़ावा देने और भाषा, साक्षरता तथा डिजिटल बाधाओं को दूर कर, पूरे क्षेत्र में अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित करने की एक पहल के रूप में परिकल्पित किया गया है।

एमओयू के अंतर्गत दोनों संस्थान उच्च-स्‍तरीय नेपाली भाषा डेटासेट, वाक् कॉर्पस तथा वाक्-से-पाठ, पाठ-से-वाक्, मशीन अनुवाद और बहुभाषी संवादात्मक एआई क्षमताओं सहित बहुभाषी एआई संसाधनों के विकास में सहयोग करेंगे। यह साझेदारी भारत-नेपाल क्षेत्र की अल्प-संसाधनयुक्त और कम प्रतिनिधित्व वाली भाषाओं की भाषाई एवं साहित्यिक विरासत के संरक्षण और डिजिटलीकरण को भी समर्थन प्रदान करेगी, जिससे उन समुदायों को अपनी मातृ-भाषा में एआई-सक्षम उपकरणों तथा सेवाओं तक पहुंच मिल सके, जिनकी भाषाएं डिजिटल विलुप्ति के जोखिम का सामना कर रही हैं।

भाषिणी के खुले और अंतर-संचालनीय भाषा प्रौद्योगिकी पारितंत्र के माध्यम से यह सहयोग नेपाल सरकार को नागरिकों तक डिजिटल सार्वजनिक सेवाओं का विस्तार उनकी पसंदीदा भाषाओं में करने में सहायता प्रदान करेगा, जिससे अंतिम छोर तक भाषा, साक्षरता और डिजिटल पहुंच संबंधी बाधाओं को कम किया जा सकेगा। यह एमओयू प्राकृतिक भाषा संसाधन (एनएलपी), बहुभाषी एआई तथा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के क्षेत्रों में संयुक्त अनुसंधान, क्षमता विकास, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रायोगिक परियोजनाओं की भी परिकल्पना करता है, जिसके अंतर्गत दोनों देशों के विश्वविद्यालयों, शोधकर्ताओं, भाषा विशेषज्ञों और प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों को एक साथ लाया जाएगा।

इस साझेदारी से नेपाल के नागरिकों, विद्यार्थियों, उद्यमियों और पेशेवरों के लिए शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल वाणिज्य तथा सार्वजनिक सेवाओं तक बहुभाषी पहुंच को सक्षम बनाकर, नेपाल के भीतर तथा क्षेत्रीय और वैश्विक बाजारों में नए आर्थिक और सामाजिक अवसरों का सृजन करने की भी अपेक्षा की जाती है।

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा, “काठमांडू यूनिवर्सिटी के साथ यह साझेदारी क्षेत्र के लिए समावेशी भाषा प्रौद्योगिकी के विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भाषिणी का खुला डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना मॉडल दक्षिण एशिया के लाखों नागरिकों के लिए डिजिटल पहुंच में परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है। यह सहयोग हमें भारत की सीमाओं से परे इस विज़न का विस्तार करने में सहायता प्रदान करेगा, साथ ही हमारी साझा भाषाई और सांस्कृतिक विरासत को सुदृढ़ करते हुए वैश्विक दक्षिण के लिए बहुभाषी एआई की अगली पीढ़ी के विकास को भी आगे बढ़ाएगा।”

काठमांडू यूनिवर्सिटी के एसोसिएट डीन, प्रोफेसर बाल कृष्ण बाल ने कहा, “यह एमओयू भाषाई समावेशन और सामाजिक प्रभाव के लिए एआई की क्षमता के उपयोग को लेकर नेपाल और भारत की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है। काठमांडू यूनिवर्सिटी के डीपीआई-एआई सेंटर और भाषिणी के बीच सहयोग के माध्यम से हम बहुभाषी एआई के क्षेत्र में अनुसंधान, नवाचार और क्षमता विकास को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे हमारी समृद्ध भाषाई विरासत डिजिटल भविष्य में सहभागिता के लिए बाधा नहीं, बल्कि एक प्रेरक शक्ति बन सके।”

डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी) के बारे में:

डिजिटल इंडिया कॉरपोरेशन (डीआईसी), इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत डिजिटल इंडिया भाषिणी प्रभाग (डीआईबीडी), एआई-संचालित बहुभाषी डिजिटल समावेशन और भाषा प्रौद्योगिकी के लिए भारत की राष्ट्रीय पहल है। नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी (एनएचएलटी) के माध्यम से भाषिणी शासन, सार्वजनिक मंचों और संस्थानों के लिए भारतीय भाषाओं में विस्तार-योग्य वाक् तथा पाठ-आधारित एआई सेवाएं उपलब्ध कराता है। यह मंच 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को समर्थन देता है, प्रतिदिन 1.5 करोड़ से अधिक इन्फरेंस को प्रोसैस करता है तथा 36 भारतीय पाठ भाषाओं, 23 भारतीय वाक् भाषाओं और 35 अंतरराष्ट्रीय भाषाओं को समर्थन प्रदान करता है। डीआईबीडी मुक्त-स्रोत नवाचार, बहुभाषी एआई अनुसंधान, डेटासेट निर्माण, स्टार्टअप संवर्धन और शैक्षणिक सहयोग को भी बढ़ावा देता है, जिससे भारत के डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना पारितंत्र को सुदृढ़ किया जा सके।

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