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भारत में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय परीक्षण शाला ने ऊर्जा दक्षता ब्यूरो के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एनटीएच), उपभोक्ता मामले विभाग और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई), विद्युत मंत्रालय के बीच आज यहां एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए। इसका उद्देश्य देश भर में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई एक महत्वपूर्ण पहल, मानक और लेबलिंग (एसएंडएल) कार्यक्रम को मजबूती देना है। भारत सरकार के उपभोक्ता मामले विभाग की सचिव निधि खरे और विद्युत मंत्रालय के सचिव पंकज अग्रवाल की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।

समझौता ज्ञापन की कुछ मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:

  • बीईई, एनटीएच को रेफरल (परामर्श) प्रयोगशाला के रूप में मान्यता देगा और परीक्षण परिणामों से जुड़े तकनीकी विवादों से संबंधित मामलों को परामर्श के लिए भेजेगा।
  • बीईई, एनटीएच अधिकारियों की विशेषज्ञता को ध्यान में रखते हुए अपनी विभिन्न तकनीकी समितियों में एनटीएच के अधिकारियों को नामित करेगा।
  • एनटीएच, एनटीएच क्षेत्रीय प्रयोगशालाओं/ दिल्ली स्थित बीईई मुख्यालय में बीईई अधिकारियों के लिए क्षमता निर्माण प्रशिक्षण आयोजित करेगा।
  • बीईई के मौजूदा एस एंड एल कार्यक्रम की पूर्ण समीक्षा, जिसमें जांच परीक्षण प्रक्रियाएं शामिल हैं।
  • आपसी सहमति से एस एंड एल योजना से संबंधित कोई अन्य तकनीकी मामला।

इस अवसर पर, डीओसीए सचिव निधि खरे ने कहा, “उत्पाद को नाकाम होने के लिए नहीं बल्कि लंबे समय तक चलने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। उपभोक्ताओं की सुविधा और उनके अधिकारों को सुनिश्चित करने के लिए, यह समझौता ज्ञापन एनटीएच और बीईई के बीच एक चिरस्थायी संबंध की दिशा में एक कदम साबित होगा।”

विद्युत मंत्रालय में सचिव पंकज अग्रवाल ने कहा कि विद्युत उपकरणों और उत्पादों की स्टार रेटिंग बीईई द्वारा प्रदान की जाती है। उन्होंने कहा, “हमें यह जांचने की आवश्यकता है कि हमसे स्टार रेटिंग प्राप्त करने वाला उद्योग लगातार मापदंडों पर खरा उतर रहा है या नहीं। इस बात को सुनिश्चित करने के लिए, हमने बाजार निगरानी और भरोसेमंद परीक्षण के लिए उपभोक्ता मामलों के विभाग के साथ हाथ मिलाया है।”

यह उल्लेख करना जरूरी है कि भारत सरकार के विभागों राष्ट्रीय परीक्षण शाला (एक प्रमुख वैज्ञानिक और परीक्षण एजेंसी) और ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (अपने एस एंड एल कार्यक्रम के माध्यम से) के बीच समझौता ज्ञापन निश्चित रूप से बिजली की बचत करके ऊर्जा संरक्षण के संबंध में देश के सतत विकास में मदद करेगा और इस प्रकार कार्बन फुटप्रिंट में भी कमी आएगी। यह आत्मनिर्भर भारत बनाने की दिशा में एक बड़ी छलांग होगी।

समझौता ज्ञापन पर बीईई सचिव मिलिंद देवरे और एनटीएच के महानिदेशक आलोक कुमार श्रीवास्तव ने हस्ताक्षर किए।

उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के तहत आने वाला एक प्रमुख संस्थान एनटीएच 1912 से राष्ट्र की सेवा कर रहा है। केंद्र सरकार के तहत, भारत की सबसे बड़ी बहु-विषयक परीक्षण प्रयोगशाला के रूप में, एनटीएच राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों मानकों का पालन करते हुए विभिन्न क्षेत्रों में तकनीकी परामर्श, परीक्षण, मापांकन और गुणवत्ता मूल्यांकन प्रदान करता है।

बीईई की स्थापना वर्ष 2002 में भारतीय अर्थव्यवस्था की ऊर्जा तीव्रता को कम करने के मिशन के साथ की गई थी। ऊर्जा संरक्षण के लिए नीतियों और रणनीतियों को विकसित करने में बीईई की भूमिका सतत विकास को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण रही है।

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