भारत

एनबीए ने एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग व्यवस्था के अंतर्गत 33 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राष्ट्रीय संस्थानों को लगभग 3.79 करोड़ रुपये वितरित किए

राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) ने 33 राज्य जैव विविधता बोर्डों (एसबीबी) और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों (यूटीबीसी), आईसीएआर-राष्ट्रीय पादप आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो (एनबीपीजीआर) और हरियाणा राज्य जैव विविधता बोर्ड के द्वारा हिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन और अनुसंधान केंद्र को पहुंच और लाभ साझाकरण (एबीएस) के रूप में लगभग 3.79 करोड़ रुपये वितरित किए हैं।

इस विज्ञप्ति में भारत की कृषि जैव विविधता की एक विस्तृत श्रृंखला सम्मिलित है, जिसमें टमाटर, मिर्च, बैंगन, फूलगोभी, तरबूज, करेला, लौकी, भिंडी, सरसों की किस्में और डीप-फ्रोजन साहीवाल गाय का स्पर्म शामिल है। अनुसंधान और व्यावसायिक उपयोग के लिए सब्जी और तिलहन के आनुवंशिक संसाधनों तक पहुंच प्राप्त करने के लिए मेसर्स बायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स एडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड जैसी कंपनियों से एबीएस राशि प्राप्त की गई थी।

इसके अतिरिक्त, साहीवाल मवेशियों के स्पर्म तक पहुंच के लिए श्रीलंका सरकार के पशु उत्पादन एवं स्वास्थ्य विभाग से एबीएस राशि प्राप्त हुई। जैविक विविधता अधिनियम, 2002 के अंतर्गत लागू और नागोया प्रोटोकॉल के अनुरूप भारत का एबीएस ढांचा, अन्य देशों के उपयोगकर्ताओं द्वारा जैविक संसाधनों तक पहुंच के समय समान लाभ साझाकरण सुनिश्चित करता है। चूंकि कंपनियों ने बाजारों, व्यापारियों या मध्यस्थों के माध्यम से जैविक संसाधनों तक पहुंच बनाई इसलिए पहुंच के मूल स्रोत को पहचाना नहीं जा सका। ऐसे मामलों में, एनबीए ने एक विशेषज्ञ समिति द्वारा तैयार और प्राधिकरण द्वारा अनुमोदित लाभ-साझाकरण पद्धति को अपनाया।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रकाशित खेती क्षेत्र के आंकड़ों का उपयोग करते हुए, संबंधित फसलों की खेती वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के एसबीबी और यूटीबीसी के बीच एबीएस राशि का आनुपातिक वितरण किया गया। लाभार्थियों को जारी किए गए जैविक संसाधनों और एबीएस राशि का विवरण नीचे दिया गया है:

जैविक संसाधनकंपनीएबीएस राशि जारी की गईराज्य / लाभार्थी
फूलगोभी (ब्रासिका ओलेरासिया वर. बोट्राइटिस) के बीज की किस्में और संकरबायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड26.98 लाख रुपये30 एसबीबी/यूटीबीसी
तरबूज (सिट्रुलस लैनैटस) के बीज की किस्में और संकर किस्मेंबायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड24.32 लाख रुपये25 एसबीबी/यूटीबीसी
टमाटर (सोलनम लाइकोपर्सिकम) के बीज की किस्में और संकरबायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड86.56 लाख रुपये31 एसबीबी/यूटीबीसी
मिर्च (कैप्सिकम एनम) के बीज की किस्में और संकर किस्मेंबायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड83.76 लाख रुपये32 एसबीबी/यूटीबीसी
बैंगन (सोलनम मेलोंगेना) के बीज की किस्में और संकर बीजबायर साइंस एंड इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड और एचएम क्लॉज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड7.18 लाख रुपये31 एसबीबी/यूटीबीसी
करेला, लौकी, बैंगन, फूलगोभी, हरी मिर्च, भिंडी और टमाटर के जर्मप्लाज्मएडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड148 लाख रुपये31 एसबीबी/यूटीबीसी
सरसों (ब्रासिका जुनसिया) के बीज की किस्मेंएडवांटा एंटरप्राइजेज लिमिटेड0.57 लाख रुपयेआईसीएआर-एनबीपीजीआर, नई दिल्ली
साहीवाल मवेशी (बोस इंडिकस) स्पर्मश्रीलंका का पशु उत्पादन एवं स्वास्थ्य विभाग0.98 लाख रुपयेहिसार बोवाइन स्पर्म स्टेशन और अनुसंधान केंद्र (हरियाणा एसबीबी के माध्यम से)

एबीएस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा निम्नलिखित राज्यों को जारी किया गया, जो संबंधित फसलों की खेती में उनके महत्वपूर्ण योगदान को प्रदर्शित है:

क्र.सं.राज्य/केंद्र शासित प्रदेशजारी की गई राशि
1.मध्य प्रदेश46.93 लाख रुपये
2.पश्चिम बंगाल44.76 लाख रुपये
3.ओडिशा44.08 लाख रुपये
4.गुजरात34.76 लाख रुपये
5.आंध्र प्रदेश29.21 लाख रुपये
6.बिहार29.20 लाख रुपये
7.कर्नाटक21.34 लाख रुपये
8.छत्तीसगढ़18.49 लाख रुपये
9.तमिलनाडु16.57 लाख रुपये
10.उत्तर प्रदेश16.24 लाख रुपये
11।महाराष्ट्र16.15 लाख रुपये
12.तेलंगाना9.24 लाख रुपये
13.हरि‍याणा8.76 लाख रुपये
14.असम8.49 लाख रुपये
15.झारखंड8.14 लाख रुपये
16.पंजाब7.41 लाख रुपये
17.राजस्थान5.17 लाख रुपये
18.अन्य13.70 लाख रुपये

लाभार्थी एसबीबी और यूटीबीसी को इन निधियों का उपयोग जन जैव विविधता रजिस्टरों की तैयारी और अद्यतन, जैव विविधता के इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण, जैव विविधता विरासत स्थलों को सुदृढ़ करने, जैव विविधता प्रबंधन समितियों की क्षमता निर्माण और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास जैसी गतिविधियों के लिए करना आवश्यक है। इससे यह सुनिश्चित होता है कि भारत के जैविक संसाधनों के व्यावसायिक उपयोग से प्राप्त लाभों का पुनर्निवेश जैव विविधता संरक्षण और सामुदायिक कल्याण में किया जाए।

इन घोषणाओं से कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे को लागू करने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि होती है, विशेष रूप से आनुवंशिक संसाधनों के उपयोग से प्राप्त लाभों के निष्पक्ष और समान वितरण से संबंधित लक्ष्य 13 और आनुवंशिक विविधता के संरक्षण से संबंधित लक्ष्य 4 के प्रति। यह पहल सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी 2 (शून्य भूख), एसडीजी 12 (जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन), एसडीजी 15 (भूमि पर जीवन) और एसडीजी 17 (लक्ष्यों के लिए साझेदारी) सहित एसडीजी 17 की प्राप्ति में भी योगदान देती है।

एनबीए द्वारा एबीएस के माध्यम से अब तक कुल 166 करोड़ रुपये से अधिक का वितरण हो चुका है, और प्रत्येक राशि का वितरण जैव विविधता संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और भारत के समृद्ध जैविक संसाधनों का संरक्षण करने वाले समुदायों की आजीविका के बीच के संबंध को और सुदृढ़ करता है।

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