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NHRC Chairman Justice Arun Mishra for a prosperous India by 2047 Dr. B.R. Supported Ambedkar's economic principles
भारत

NHRC अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने 2047 तक समृद्ध भारत के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर के आर्थिक सिद्धांतों का समर्थन किया

राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), भारत के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा ने कहा कि डॉ. बी.आर. अम्बेडकर की आर्थिक नीति सिफारिशें, मुक्त बाजार सिद्धांत, वैश्वीकरण, उदारीकरण और निजीकरण आज के लिए अच्छे हैं। वह आज भारतीय लोक प्रशासन संस्थान, नई दिल्ली में “विकसित भारत @2047 को आकार देने के लिए डॉ. बी. आर. अंबेडकर का दृष्टिकोण और विरासत” विषय पर 16वां डॉ. अंबेडकर स्मृति व्याख्यान दे रहे थे।

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की विरासत भावी पीढ़ियों को 2047 तक अधिक समृद्ध और विकसित राष्ट्र के लिए आवश्यक अधिक न्यायपूर्ण और न्यायसंगत समाज की दिशा में काम करने के लिए प्रेरित करती है। जीडीपी वृद्धि का परिणाम विकास के संवैधानिक दृष्टिकोण के अनुरूप लोगों का जीवन गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। जीवन की गुणवत्ता में सुधार होना चाहिए, जिससे भौतिक कल्याण, बौद्धिक और आध्यात्मिक स्वतंत्रता और प्रगति सुनिश्चित हो सके।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि महर्षि अरबिंदो के प्रतिपादन के अनुसार भारत विश्व का नैतिक नेता बनेगा। उन्होंने कहा: “भारत के भाग्य का सूर्य उदय होगा और पूरे भारत को अपनी रोशनी से भर देगा और भारत, एशिया और पूरे विश्व को जगमग कर देगा।” उन्होंने कहा कि भारत अपनी संस्कृति, दर्शन और आपसी श्रद्धा के कारण दुनिया का सबसे सफल लोकतंत्र है। हम विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। आइए हम बिना देर किए अपना कर्तव्य निभाने का संकल्प लें और स्‍वयं के लिए कम और मानवता के लिए अधिक सोचें – “स्वस्मै स्वल्पं समाजाय सर्वस्वं।”

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि मुफ्त उपहारों के वितरण पर विचार किया जाना चाहिए कि क्या यह निर्देशक सिद्धांतों का समर्थन करता है या उनके उद्देश्यों को विफल करता है। गरीबों के लिए वितरणात्मक न्याय सहित अन्य उद्देश्यों के लिए आवश्यक सीमित धन संसाधनों को ध्यान में रखते हुए, यह विकास में बाधा उत्पन्न कर सकता है। लाभों का मनमाना वितरण नहीं किया जा सकता है और राज्य की उदारता और स्व-निर्मित दिवालियापन वैधानिक कर्तव्यों और नागरिक दायित्वों को पूरा करने के लिए कोई बचाव नहीं है।

इसी तरह, उन्होंने कहा कि भाग IV में उल्लिखित निदेशक सिद्धांत शासन में मौलिक हैं, जो सामूहिक हित के लिए किसी व्यक्ति के अधिकारों को कुछ हद तक कम कर देते हैं। बृहदारण्यक उपनिषदों का लक्ष्य सामूहिक भलाई और सार्वभौमिक मानव कल्याण भी है। इसमें कहा गया है, “ऊं सर्वे भवन्तु सुखिनः”

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि डॉ. अंबेडकर ने ऋग्वेद की समानता की अवधारणा को आगे बढ़ाया, जो मानव अधिकारों के लिए मौलिक है। ऋग्वेद मानव अधिकारों की सार्वभौम घोषणा (यूडीएचआर) में परिभाषित समानता के दायरे से परे है। इसके बजाय यह हमारे सभी संकल्पों और कार्यों में एकता का आग्रह करता है।

समानी व आकूति: समाना ह्रदयानि व:।

समानमस्तु वो मनो यथा व: सुसहासति॥

“आपके संकल्प, दिल और दिमाग में एकता हो; आप सभी में सहयोग के साथ जीने का संकल्प दृढ़ रहे।”

जस्टिस मिश्रा ने कहा कि दलित वर्ग को मुक्ति दिलाने के लिए आरक्षण एक बहुत ही प्रभावी उपकरण है। इसका लाभ, कुल मिलाकर, अभी तक सबसे जरूरतमंद और सबसे गरीब लोगों तक नहीं पहुंच पाया है। आरक्षण का लाभ निचले तबके तक पहुंचाना संभव नहीं हो सका है।

उन्होंने कहा कि एस.सी./एस.टी. की सूची में शामिल विभिन्न जातियों के बीच असमानता है। इसका लाभ उन जातियों (वर्गों) द्वारा हड़प लिया जा रहा है जो सामाजिक रूप से ऊपर हैं और सेवाओं में पर्याप्त प्रतिनिधित्व करते हैं। भूख लगने पर प्रत्येक व्यक्ति को रोटी देकर भोजन कराना चाहिए। फलों की पूरी टोकरी किसी एक को नहीं दी जा सकती। हमें सकारात्मक कार्रवाई के जरिए उन लोगों को आरक्षण का लाभ देना होगा जो अभी भी इससे वंचित हैं, ताकि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

डॉ. अम्बेडकर ने ओबीसी के लिए आरक्षण की मांग की। हालाँकि 1990 के दशक में मंडल आयोग के बाद ओबीसी के लिए आरक्षण लागू किया गया था, बाबासाहेब अम्बेडकर ने 1952 में काका कालेकर की सिफारिशों के रूप में उनके लिए मार्ग प्रशस्त किया।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि देश का भविष्य अगली पीढ़ी पर निर्भर करता है और बच्चों और किशोरों के अधिकारों को शोषण से विशेष रूप से संरक्षित किया जाना चाहिए। हाशिए के समुदायों, दलितों और युवाओं में मानव पूंजी की अपार संभावनाएं हैं। उन्हें स्वतंत्रता और सम्मान के साथ स्वस्थ रूप से विकसित होने के अवसर और सुविधाएं दी जानी चाहिए और नैतिक और भौतिक परित्याग के खिलाफ अधिकार होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि दूर-दराज के इलाकों में शिक्षकों की कमी को देखते हुए एनएचआरसी ने हाल ही में शिक्षा के एक मिश्रित रूप की सिफारिश की है। हमारा दर्शन है “सा विद्या या विमुक्तये”।

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि पेड़ों, नदियों, जल निकायों, वनस्पतियों और जीवों का संरक्षण करने और ग्लोबल वार्मिंग को रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए अनुच्छेद 48 और 51 ए (जी) के तहत संवैधानिक कर्तव्य निभाने का समय आ गया है। ग्रीनहाउस गैसों को कम करने और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए ऑटोमोबाइल उद्योग द्वारा एक चक्रीय अर्थव्यवस्था और रीसाइक्लिंग आवश्यक है।

एनएचआरसी अध्यक्ष ने कहा कि संवैधानिक जनादेश समान नागरिक संहिता बनाना है, जो महिलाओं के खिलाफ भेदभाव को खत्म करने के लिए आवश्यक है। कार्यस्थल पर महिलाओं को संरक्षा, सुरक्षा और सम्मान प्रदान किया जाना चाहिए। महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए, हमें लिंग के आधार पर महिलाओं के खिलाफ सभी प्रकार के भेदभाव को खत्म करना होगा, खासकर शिक्षा, रोजगार, विरासत और संपत्ति के संबंध में। दुनिया भर में, महिलाओं के साथ नागरिक अधिकारों के मामले में भेदभाव किया जाता है और लैंगिक समानता के मापदंडों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करके पुरुषों और महिलाओं को समान बनाने के लिए एक मानक नागरिक संहिता की आवश्यकता है। महिलाओं को सामाजिक समानता, बेहतर स्थिति और आर्थिक विकास में भागीदारी का उपयोग करना चाहिए।

उन्होंने कहा कि देश में अभिव्यक्ति और जानकारी हासिल करने की स्‍वतंत्रता है। भारत में मीडिया ने लोगों को संवेदनशील बनाने और शासन के बारे में जानकारी प्रदान करने में केंद्रीय भूमिका निभाई है। मानव अधिकार संबंधी मुद्दों को उजागर करने और प्रकाश डालने में मीडिया का योगदान सबसे प्रभावशाली रहा है।

न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा कि एनएचआरसी संवैधानिक दृष्टिकोण को प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसे आगे बढ़ाने के लिए, आयोग ने विभिन्न परामर्शी जारी की हैं –

  • ट्रक ड्राइवरों के संबंध में – उन्हें बीमा कवरेज, रुकने के स्थान, स्वास्थ्य जांच सुविधाएं, पर्याप्त पारिश्रमिक और उचित कार्य घंटे प्रदान करना।
  • सेप्टिक टैंकों की खतरनाक सफाई में शामिल श्रमिकों को सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराए जाने चाहिए और मशीनीकृत सफाई की व्यवस्था की जानी चाहिए।
  • नेत्र संबंधी आघात की रोकथाम के लिए, पीड़ितों के लिए पुनर्वास केंद्र, श्रमिकों के लिए व्यक्तिगत बीमा कवरेज प्रदान करने के लिए खतरनाक उद्योग, चीनी पटाखों, नुकीले खिलौनों और रसायनों और आंखों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता वाले अल्कलॉइड पर प्रतिबंध की सिफारिश की गई है।
  • 97 कानूनों में संशोधन, जो हैनसेन रोग से पीड़ित व्यक्ति के लिए भेदभावपूर्ण हैं।
  • कैदियों द्वारा खुद को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए, बाथरूम में कोई भी बंधन वाली वस्तु नहीं होनी चाहिए और उनके मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना चाहिए।
  • सीसैम- बच्चों को ऑनलाइन यौन शोषण से बचाने के लिए एक परामर्शी में आपत्तिजनक सामग्री को हटाने के लिए बिचौलियों की जिम्मेदारी और अन्य दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
  • देश के सभी मानसिक अस्पतालों की निगरानी और मानसिक मुद्दों को सुनिश्चित करना।

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