राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लिया है कि महाराष्ट्र के मुंबई क्षेत्र के विरार में एक आवासीय टाउनशिप में एक निजी सीवेज उपचार संयंत्र की सफाई के दौरान जहरीली गैसों के कारण दम घुटने से चार लोगों की मौत हो गई, जिनकी उम्र लगभग 20 वर्ष थी। कथित तौर पर, प्रारंभिक जांच से पता चला है कि कर्मचारी, वसई क्षेत्र के निवासी, बिना किसी सुरक्षा गियर के सीवेज प्लांट में प्रवेश कर गए थे।
आयोग ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की सामग्री, यदि सही है, तो यह मानव अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इस मामले में ठेकेदार की ओर से पूर्णतया लापरवाही बरती गई है क्योंकि उसने पीड़ितों को कानून और निर्धारित मानदंडों के साथ-साथ एनएचआरसी द्वारा जारी परामर्शी का उल्लंघन करते हुए बिना किसी सुरक्षा सावधानियों के ऐसे खतरनाक काम को अंजाम देने के लिए नियुक्त किया गया था। सुरक्षा गियर/उपकरण का उपयोग किए बिना खतरनाक सफाई के खतरे के बारे में आम लोगों के बीच जागरूकता फैलाना राज्य अधिकारियों का कर्तव्य है।
तदनुसार, आयोग ने महाराष्ट्र के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। रिपोर्ट में दोषियों के खिलाफ की गई कार्रवाई और मृतकों के निकट संबंधियों को दिए गए मुआवजे, यदि कोई हो, की स्थिति शामिल होनी चाहिए। आयोग यह भी जानना चाहेगा कि क्या संबंधित अधिकारियों द्वारा शीर्ष अदालत के दिशानिर्देशों और एनएचआरसी द्वारा जारी परामर्शी का अनुपालन किया जा रहा है। जवाब चार सप्ताह के भीतर अपेक्षित है।
10 अप्रैल, 2024 को जारी मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सभी चारों पीड़ित बीस साल के थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। दो अन्य कर्मचारियों, जो उनकी तलाश में संयंत्र के अंदर गए थे, ने भी बेचैनी की शिकायत की और उन्हें इलाज की आवश्यकता हुई।
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