राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC) ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है, जिसके अनुसार 6 जुलाई, 2025 की रात बिहार के पूर्णिया जिले में जादू-टोना करने के संदेह में अनुसूचित जनजाति के एक ही परिवार के पांच सदस्यों, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थी, उनकी कथित तौर पर हत्या कर दी गई और शवों को जला दिया गया था।
आयोग के अनुसार समाचार रिपोर्ट की विषय-वस्तु यदि सच है, तो ये मानवाधिकारों के उल्लंघन का यह गंभीर मुद्दा है। इसलिए आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी कर मामले की जांच की वर्तमान स्थिति और अपराधियों की गिरफ्तारी सहित दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
आयोग ने बिहार सरकार को 16 वर्षीय किशोर, जो कथित तौर पर पीड़ित परिवार का एकमात्र जीवित व्यक्ति और इस दर्दनाक घटना का प्रत्यक्षदर्शी है, को परामर्श प्रदान करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने का भी निर्देश दिया है।
8 जुलाई, 2025 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, परिवार के एकमात्र जीवित 16 वर्षीय लड़के ने पुलिस को बताया कि लगभग 50 लोगों की भीड़ उनके घर में घुसी और उसकी मां पर जादू-टोना करने का आरोप लगाया। भीड़ ने पहले उसकी मां को डायन बताकर बांस के डंडों से पीटा, फिर मां को बचाने आए परिवार के बाकी सदस्यों पर भी हमला कर दिया और उसके सामने ही उन सभी की हत्या कर दी गई। हमलावरों ने बाद में कथित तौर पर शवों को उनके घर से लगभग 100-150 मीटर दूर ले जाकर आग लगा दी। बताया जा रहा है कि ग्रामीणों को शक था कि गांव के एक लड़के की मौत और बीमारी का कारण पीड़ित परिवार द्वारा जादू-टोना करना था।
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