राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग (NHRC), भारत ने एक मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लिया है, रिपोर्ट के अनुसार झारखंड के जमशेदपुर स्थित एमजीएम अस्पताल में प्रसव पीड़ा से जूझ रही एक गर्भवती महिला को बेहतर चिकित्सा देखभाल के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र द्वारा रेफर किए जाने के बाद भी लगभग 27 घंटों तक उसकी देखभाल नहीं की गई। कथित तौर पर, उसे फर्श पर लेटना पड़ा क्योंकि अस्पताल में कोई बिस्तर उपलब्ध नहीं था। हालांकि, कोई इलाज न मिलने के कारण अगले दिन उसके बच्चे की गर्भ में ही मृत्यु हो गई। यह भी बताया गया कि एक अन्य महिला जिसने बच्चे को जन्म दिया था उसका इलाज फर्श पर किया जा रहा था।
NHRC ने पाया है कि मीडिया रिपोर्ट की विषय-वस्तु, यदि सत्य है, तो यह मानव अधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा है। तदनुसार, आयोग ने झारखंड सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
रिपोर्ट में पीड़ित महिला के स्वास्थ्य की स्थिति और राज्य के सरकारी अस्पतालों में बिस्तरों की उपलब्धता के साथ-साथ अन्य सुविधाओं की स्थिति को भी शामिल करने की अपेक्षा है। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया जाना चाहिए कि क्या अधिकारियों द्वारा पीड़ित परिवार को कोई मुआवजा दिया गया है।
यूनेस्को के विश्व धरोहर केंद्र ने भारत के तीन नए स्थलों को विश्व धरोहरों की…
दिल्ली उच्च न्यायालय ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका…
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी…
भारतीय सेना का सर्वोच्च स्तरीय द्विवार्षिक मंच सेना कमांडरों का सम्मेलन आज से शुरू हो…
भारत के केंद्रीय अप्रत्क्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) तथा न्यूज़ीलैंड सीमा शुल्क सेवा…
भारत ने अपुष्ट आरोपों के आधार पर चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए मानवाधिकारों…