भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) के अंतर्गत राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली (निफ्टेम-के) ने विश्व खाद्य भारत-2025 के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के अग्रणी संगठनों, उद्योग भागीदारों और शैक्षणिक संस्थानों के साथ नौ रणनीतिक समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसके साथ ही संस्थान ने अपने वैज्ञानिकों द्वारा विकसित सात नवीन तकनीकों को प्रतिष्ठित कंपनियों को सफलतापूर्वक हस्तांतरित किया है, जिससे शिक्षा जगत और उद्योग जगत के बीच की कड़ी और मजबूत हुई है।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एमओएफपीआई के सचिव ए.पी. दास जोशी और मंत्रालय के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ। निफ्टेम-के के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने साझेदारों के साथ लाइसेंस और समझौता ज्ञापनों की प्रतियों का आदान-प्रदान किया। हस्तांतरित प्रौद्योगिकियों में शामिल हैं:
सहयोगात्मक प्रयासों को और बढ़ावा देने के लिए क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया, द गुड फूड इंस्टीट्यूट, आलमंड बोर्ड कैलिफोर्निया, डैनोन इंडिया, क्लियर मीट प्राइवेट लिमिटेड, गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (ग्रेटर नोएडा), इंस्टीट्यूट ऑफ बायोरिसोर्सेज एंड सस्टेनेबल डेवलपमेंट (इम्फाल), रेजुवोम थेरेप्यूटिक्स (बेंगलोर) और इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज (नई दिल्ली) के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
ये साझेदारियां और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण खाद्य नवाचार को बढ़ावा देने, पोषण सुरक्षा को बढ़ाने और भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सतत विकास को बढ़ावा देने, उद्यमशीलता को सशक्त बनाने और समाज के लिए प्रभावशाली समाधान प्रदान करने के निफ्टेम-के के मिशन की पुष्टि करते हैं।
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