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NIRL और महाप्रीत ने हरित ऊर्जा क्षेत्र स्थापित करने के लिए समझौता को आगे बढ़ाया

भारत की अक्षय ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, एनएलसी इंडिया लिमिटेड के पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनएलसी इंडिया रिन्यूएबल्स लिमिटेड (एनआईआरएल) ने आज मुंबई में महात्मा फुले रिन्यूएबल एनर्जी एंड इंफ्रास्ट्रक्चर टेक्नोलॉजी लिमिटेड (महाप्रीट) के साथ एक संयुक्त उद्यम समझौते (जेवीए) पर हस्ताक्षर किए। कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त, एनएलसी इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक प्रसन्ना कुमार मोटुपल्ली, महाप्रीट के प्रबंध निदेशक बिपिन शिरमली, संचालन निदेशक विजयकुमार कलम पाटिल और एनआईआरएल और महाप्रीट के वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में हस्ताक्षर हुए। यह 16 अप्रैल 2025 को एनआईआरएल और महाप्रीट के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) का ही एक हिस्सा है।

यह सहयोग एनआईआरएल के रणनीतिक विस्तार और महाराष्ट्र राज्य के संपन्न अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में प्रवेश में एक प्रमुख मील का पत्थर है। इस समझौते के तहत गठित होने वाली संयुक्त उद्यम कंपनी (जेवीसी) सौर, पवन, हाइब्रिड, फ्लोटिंग सोलर, बीईएसएस, पंप स्टोरेज और सोलर पार्क सहित 2000 मेगावाट तक की अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं को विकसित करने में सहायक होगी, जिसमें प्रथम चरण में 500 मेगावाट पर प्रारंभिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसे अंततः महाराष्ट्र में 5000 मेगावाट तक बढ़ाया जाएगा। जेवीसी में एनआईआरएल की 74% और महाप्रीट की 26% इक्विटी संरचना होगी।

इस समझौते के तहत, महाप्रीट ग्रिड को पावर इवैक्यूएशन सिस्टम के विकास में सहायता के अलावा परियोजनाओं के लिए भूमि की पहचान और आवंटन में सुविधा प्रदान करेगा। दूसरी ओर, एनआईआरएल विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने, वित्त की व्यवस्था करने और आरई परियोजनाओं के विकास में मदद करेगा।

संयुक्त उद्यम कम्पनी विद्युत अधिनियम की धारा 62 या 63 के अंतर्गत प्रतिस्पर्धी और विनियमित मार्गों के माध्यम से बिजली की बिक्री करेगी तथा इसका लक्ष्य डिस्कॉम, सरकारी संस्थाएं और वाणिज्यिक एवं औद्योगिक उपभोक्ता होंगे।

कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि एनआईआरएल और महाप्रीट के बीच इस संयुक्त उद्यम समझौते पर हस्ताक्षर करना, देश में हरित ऊर्जा को गति देने वाली सहयोगी भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता का प्रदर्शन है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की अक्षय ऊर्जा क्षमता अपार है और परियोजना निष्पादन में एनआईआरएल की सिद्ध विशेषज्ञता और महाप्रीट की क्षेत्रीय ताकत के साथ, यह संयुक्त उद्यम सतत विकास और ऊर्जा सुरक्षा के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा। सचिव ने कहा कि कोयला क्षेत्र सक्रिय रूप से डीकार्बोनाइजेशन का समर्थन कर रहा है और ऐसी साझेदारियां अक्षय ऊर्जा परिनियोजन और जलवायु लचीलेपन के लिए हमारे राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आवश्यक तालमेल का प्रतीक हैं।

यह संयुक्त उद्यम समझौता एनएलसी इंडिया लिमिटेड, इसकी नवीकरणीय शाखा एनआईआरएल की विश्वसनीयता और भारत भर में विश्व स्तरीय हरित ऊर्जा समाधान प्रदान करने में इसकी तकनीकी और परिचालन क्षमता में बढ़ते विश्वास का प्रमाण है।

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