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नीति आयोग ने नई दिल्ली में “वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक 2025″ लॉन्च किया

16वें वित्त आयोग के माननीय अध्यक्ष डॉ. अरविंद पनगढ़िया ने 24 जनवरी 2025 को नई दिल्ली में नीति आयोग की माननीय उपाध्यक्ष सुमन बेरी, नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी, नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रमण्यम, नीति आयोग के प्रतिष्ठित फेलो डॉ. अनूप सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति में नीति आयोग की रिपोर्ट “वित्तीय स्वास्थ्य सूचकांक (एफएचआई) 2025″ का उद्घाटन अंक लॉन्च किया। रिपोर्ट पांच प्रमुख उप-सूचकांकों, व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, वित्तीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता के साथ-साथ राज्य-विशेष चुनौतियों और क्षेत्रों में अंतर्दृष्टि के आधार पर 18 प्रमुख राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य का व्यापक मूल्यांकन करती है।

एफएचआई का उद्देश्य उप-राष्ट्रीय स्तर पर वित्तीय स्थिति पर प्रकाश डालना और संपोषित और लचीली आर्थिक वृद्धि के लिए नीतिगत सुधारों का मार्गदर्शन करना है। रिपोर्ट राज्यों को समग्र वित्तीय सूचकांक के आधार पर रैंक करती है, जो पांच प्रमुख उप-सूचकांकों जैसे व्यय की गुणवत्ता, राजस्व जुटाना, वित्तीय विवेक, ऋण सूचकांक और ऋण स्थिरता पर आधारित है। 67.8 के संचयी अंक के साथ, ओडिशा 18 प्रमुख राज्यों में वित्तीय स्वास्थ्य रैंकिंग में शीर्ष पर है, इसके बाद क्रमशः 55.2 और 53.6 अंक के साथ छत्तीसगढ़ और गोवा हैं। उपलब्धि हासिल करने वाले राज्य मजबूत वित्तीय स्वास्थ्य, राजस्व जुटाने, व्यय प्रबंधन और ऋण स्थिरता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं। झारखंड जैसे राज्यों में सुधार देखा जा रहा है, जिससे उसके वित्तीय विवेक और ऋण स्थिरता में मजबूती आई है, जबकि कर्नाटक को व्यय गुणवत्ता और ऋण प्रबंधन में कमजोर प्रदर्शन के कारण गिरावट का सामना करना पड़ रहा है। ये अंतर्राज्यीय असमानताएं विशिष्ट वित्तीय चुनौतियों का समाधान करने और सतत विकास सुनिश्चित करने के लिए लक्षित सुधारों की आवश्यकता पर प्रकाश डालती हैं।

16वें वित्त आयोग के माननीय अध्यक्ष, डॉ. पनगढ़िया ने रिपोर्ट लॉन्च करते हुए, राज्यों को संतुलित क्षेत्रीय विकास, दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और विवेकपूर्ण शासन के लिए एक स्थिर वित्तीय मार्ग का पालन करने की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने उल्लेख किया कि एफएचआई राज्य-स्तरीय वित्तीय प्रदर्शन को मापने के लिए एक व्यापक और व्यवस्थित दृष्टिकोण प्रदान करता है और व्यापक वित्तीय रुझानों में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करता है, जिससे देश भर में वित्तीय स्वास्थ्य की बेहतर समझ हो पाती है। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि एफएचआई रिपोर्ट राष्ट्रीय सफलता प्राप्त करने में सरकार के दोनों स्तरों की साझा जिम्मेदारी को मजबूत करते हुए, वित्तीय स्वास्थ्य और संपोषित विकास के लिए अधिक एकीकृत दृष्टिकोण को प्रोत्साहन देने में सहायता करती है।

इस अवसर पर बोलते हुए, सुमन बेरी ने इस विषय पर जोर दिया कि एफएचआई वित्तीय समेकन में, पारदर्शिता में सुधार लाने और प्रभावी संसाधन प्रबंधन को प्रोत्साहन देने के लिए एक रोडमैप प्रदान करता है। उन्होंने आगे कहा कि एफएचआई केवल एक रैंकिंग नहीं है, बल्कि राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य का आकलन करने और उसमें सुधार करने के लिए तैयार किया गया एक साधन है। यह प्रमुख वित्तीय संकेतकों के माध्यम से प्रादेशिक अर्थव्यवस्थाओं का वित्तीय कल्याण का मूल्यांकन करने के लिए एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है।

बी. वी. आर. सुब्रमण्यम ने इस विषय पर प्रकाश डाला कि एफएचआई रिपोर्ट नीति निर्माताओं को सूचित निर्णय लेने में मदद करने में सहायक होगी। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट राज्यों में वित्तीय परिदृश्य की एक लक्ष्यपरक तस्वीर प्रदान करती है और वित्तीय लचीलेपन को सुदृढ़ करने और राज्यों के संपोषित आर्थिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने लायक अंतर्दृष्टि भी प्रदान करती है। प्रमुख वित्तीय संकेतकों पर ध्यान देकर, एफएचआई राज्यों को अपनी वित्तीय रणनीतियों को राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ संरेखित करने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे वित्तीय रूप से स्थिर और समृद्ध भारत के लक्ष्य में उनका योगदान सुनिश्चित होता है और, सबसे महत्वपूर्ण बात, राज्यों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को प्रोत्साहन मिलता है। उन्होंने इस विषय पर जोर दिया कि एफएचआई से मिलने वाले परिणाम भारत के “विकसित भारत@2047” को प्राप्त करने के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जहां राज्य स्तर पर वित्तीय अनुशासन देश के आर्थिक परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डॉ. विरमानी ने टीम को बधाई दी और इस विषय पर प्रकाश डाला कि एफएचआई रिपोर्ट भारत के शासन फ्रेमवर्क को मजबूत करने में सहकारी संघवाद की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करेगी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को प्रोत्साहन देना, क्षेत्रीय असमानताओं को दूर करने और समग्र आर्थिक विकास को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।

आगे बताया गया कि यह रिपोर्ट एक वार्षिक श्रृंखला के शुभारंभ का प्रतीक है, जिसका उद्देश्य भारत के राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य में मूल्यवान, डेटा-संचालित अंतर्दृष्टि प्रदान करना, सूचित निर्णय लेने और नीतिगत हस्तक्षेप को प्रोत्साहन देना है। एफएचआई को राज्यों के वित्तीय स्वास्थ्य पर अंतर्दृष्टि प्रदान करके और हस्तक्षेप व रणनीतिक योजना की आवश्यकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करके नीति निर्माताओं की सहायता के लिए तैयार किया गया है।

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