भारतीय रेल की ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ (ओएसओपी) स्कीम स्थानीय शिल्प कौशल को बढ़ावा देने के लिए एक सशक्त मंच के रूप में उभरी है। यह पूरे देश में जमीनी स्तर पर उद्यमिता को बढ़ावा दे रही है। इस पहल का उद्देश्य रेलवे स्टेशनों को भारत की समृद्ध क्षेत्रीय विविधता के जीवंत प्रदर्शन केंद्रों में बदलना है।
स्थानीय विरासत को राष्ट्रीय रेलवे नेटवर्क के साथ एकीकृत करके, ओएसओपी न केवल यात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाता है बल्कि समावेशी आर्थिक विकास को भी बढ़ावा देता है।
19 जनवरी 2026 तक, 2,002 स्टेशनों पर ओएसओपी (एक स्टेशन एक उत्पाद) आउटलेट स्थापित किए जा चुके हैं, जिनमें से कुल 2,326 आउटलेट कार्यरत हैं। ये आउटलेट हजारों स्थानीय कारीगरों, बुनकरों और छोटे उत्पादकों के लिए आजीविका का स्रोत बन गए हैं, जिनका अब प्रतिदिन लाखों यात्रियों से सीधा संपर्क है। इसके अतिरिक्त, 2022 में ओएसओपी की शुरुआत के बाद से, इस पहल ने पूरे भारत में 1.32 लाख से अधिक लाभार्थियों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक अवसर सृजित किए हैं।
आंकड़ों के अतिरिक्त, ओएसओपी उन पारंपरिक शिल्पों और क्षेत्रीय विशिष्टताओं को पुनर्जीवित करने में मदद कर रहा है जो कभी लुप्त हो रही थीं। पूर्वोत्तर में हस्तनिर्मित मिट्टी के बर्तनों और बांस की कलाकृतियों से लेकर अन्य क्षेत्रों में मसालों, हथकरघा उत्पादों और स्थानीय मिठाइयों तक, ये उत्पाद यात्रियों को प्रत्येक क्षेत्र का सारतत्व प्रदान करते हैं।
वाणिज्य के साथ संस्कृति को समेकित करके, भारतीय रेल ने स्टेशनों को स्थानीय उद्यम के केंद्रों में बदल दिया है। ‘एक स्टेशन एक उत्पाद’ पहल “वोकल फॉर लोकल” का एक सच्चा उदाहरण है, जो समुदायों को सशक्त बनाने के साथ-साथ देश में यात्रियों के यात्रा अनुभव को समृद्ध करती है।
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