अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर, भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया और समारोह को संबोधित किया। यह राष्ट्रीय स्तर का कार्यक्रम विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की उपलब्धियों और योगदानों की खुशी मनाने और लैंगिक समानता, सुरक्षा, गरिमा और महिला सशक्तिकरण के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराने के लिए आयोजित किया गया।
राष्ट्रपति ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, न्यायपालिका, सेना, चिकित्सा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, कला और उद्यमिता जैसे हर क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वे पंचायतों में ग्रामीण विकास का नेतृत्व कर रही हैं। कई महिलाएं उद्योग, स्टार्टअप और कॉर्पोरेट जगत में नेतृत्व प्रदान करने के लिए अपनी क्षमताओं का भरपूर उपयोग कर रही हैं। वे खेलों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। ऐसे उदाहरण यह विश्वास दिलाते हैं कि यदि महिलाओं को अवसर और समर्थन मिले तो वे हर क्षेत्र में उत्कृष्टता प्राप्त कर सकती हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर तेजी से अग्रसर है। पिछले एक दशक में महिलाओं के मार्ग में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए मजबूत आधार तैयार किया गया है। भारत ने स्कूली शिक्षा में लैंगिक समानता हासिल कर ली है। उच्च शिक्षा में भी सकल नामांकन अनुपात के हिसाब से छात्राओं की संख्या अधिक है। विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) शिक्षा में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। केंद्रीय बजट 2026-27 में एसटीईएम छात्रों की पढ़ाई जारी रखने में सहायता के लिए प्रत्येक जिले में एक महिला छात्रावास की स्थापना का प्रावधान है। हमारी बेटियां ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार हो रही हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाएं रोजगार सृजनकर्ता के रूप में उभर रही हैं। स्टार्ट-अप इंडिया योजना के तहत सहायता प्राप्त करने वाले आधे से अधिक स्टार्ट-अप में कम से कम एक महिला निदेशक हैं। वर्तमान में दो लाख से अधिक महिला स्वामित्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यम सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर सक्रिय हैं। केंद्रीय बजट 2026-27 में शुरू की गई ‘एसएचई-मार्ट’ पहल स्वयं सहायता समूहों और ग्रामीण महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराएगी। पिछले वर्ष लागू किए गए श्रम संहिता का उद्देश्य महिला श्रमिकों के लिए अधिक समावेशी, सुरक्षित और सशक्त कार्य वातावरण प्रदान करना है।
राष्ट्रपति ने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए अनेक प्रयासों के बावजूद, उनके विकास पथ में अभी भी कई बाधाएं मौजूद हैं। उदाहरण के लिए, आज भी कई महिलाओं को भेदभाव, समान काम के लिए असमान वेतन और घरेलू हिंसा जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। इनका समाधान केवल कानून बनाकर नहीं किया जा सकता। सामाजिक सोच में बदलाव आवश्यक है। लैंगिक भेदभाव की मानसिकता से बाहर निकलकर ही हम समाज में सच्ची समानता स्थापित कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि सही मायने में विकास हासिल करने के लिए हमें महिलाओं की समान भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी, जो देश की लगभग आधी आबादी हैं। हमने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा है। देश की तीव्र प्रगति और राष्ट्रीय हित के लिए नागरिकों की पूर्ण क्षमता को साकार करने के लिए यह आवश्यक है कि हम न केवल महिलाओं को बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित करें, बल्कि उन सपनों को साकार करने के हर कदम पर उनका समर्थन भी करें। भय और भेदभाव से मुक्त वातावरण में महिलाएं राष्ट्र निर्माण में अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दे सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सभी नागरिकों को प्रत्येक लड़की को शिक्षा और समान अवसर प्रदान करने, महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को प्राथमिकता देने और समाज में व्याप्त सभी प्रकार के भेदभाव को समाप्त करने का संकल्प लेना चाहिए। ऐसा करके हम विश्व के समक्ष महिला सशक्तिकरण का आदर्श प्रस्तुत कर सकते हैं।
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