राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 25 जुलाई, 2026 को अपने कार्यकाल के चार वर्ष पूरे किए। इस अवसर पर, राष्ट्रपति आज 28 जुलाई 2026 को राष्ट्रपति भवन और राष्ट्रपति सम्पदा में शुरू की गई कई महत्वपूर्ण पहलों के उद्घाटन और शिलान्यास समारोहों में शामिल हुईं।
आज शुरू की गई पहलों का विवरण नीचे दिया गया है:
विभिन्न पहलों के शुभारंभ के अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि उनका निरंतर प्रयास रहा है कि राष्ट्रपति भवन भारत की समृद्ध परंपराओं, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय आदर्शों का एक जीवंत प्रतीक बना रहे। पिछले एक वर्ष में भारत के सभ्यतागत लोकाचार को बढ़ावा देने के लिए कई प्रकार के कदम उठाए गए हैं, जिनमें चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा का अनावरण, परम वीर दीर्घा और ग्रंथ कुटीर का उद्घाटन, स्टेट रूम्स का भारतीयकरण और राजकीय समारोहों में भारतीय कला और परंपराओं को प्रमुखता देना शामिल है।
बाद में, राष्ट्रपति भवन में आयोजित एक अन्य समारोह में भारत के उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रपति कार्यकाल से संबंधित प्रकाशनों का लोकार्पण किया और उनकी प्रथम प्रतियां राष्ट्रपति को भेंट कीं। इस अवसर पर, सूचना एवं प्रसारण तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री, डॉ. एल. मुरुगन और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
आज जिन प्रकाशनों का लोकार्पण किया गया, उनमें ‘राष्ट्रपति भवन : राष्ट्र का भवन’ (राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल के प्रथम वर्ष पर आधारित), ‘सेवा और संवेदना’ (कार्यकाल के द्वितीय वर्ष पर आधारित), ‘समावेशी सहभागिता’ (कार्यकाल के तृतीय वर्ष पर आधारित), ‘भारतीयता का उत्सव’ (कार्यकाल के चतुर्थ वर्ष पर आधारित) तथा ‘अमा राष्ट्रपति – अमा गौरव’ शामिल हैं। ‘अमा राष्ट्रपति – अमा गौरव’ प्रतिष्ठित व्यक्तियों द्वारा लिखे गए लेखों का ओड़िया संकलन है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि इन पुस्तकों के शीर्षक समावेशी लोकतंत्र में हमारी आस्था को परिलक्षित करते हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये सचित्र संकलन, पाठकों का राष्ट्रपति भवन की परंपराओं, कार्य-प्रणालियों और उनके बहुआयामी स्वरूप से परिचय कराएंगे। उन्होंने कहा कि इन प्रकाशनों की सार्थकता इस बात में है कि वे देशवासियों को अपनी विरासत पर गर्व के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।
राष्ट्रपति ने कहा कि जब उन्होंने 25 जुलाई, 2022 को भारत के राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण किया था तब यह उनके लिए सम्मान से अधिक दायित्व का विषय था। उन्होंने कहा कि पिछले चार वर्षों में उन्होंने इसी कर्तव्य-भावना के साथ कार्य किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति भवन में या विभिन्न राज्यों की यात्राओं के दौरान जब भी वह लोगों, विशेषकर युवाओं, से मिलती हैं तब वे उन्हें प्रेरित करती हैं कि वे नैतिक मूल्यों से जुड़े रहें और देश एवं समाज की उन्नति के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि महिलाओं से उनका आग्रह होता है कि वे स्वावलंबी बनें और आत्मविश्वास के साथ प्रगति के पथ पर आगे बढ़ें। जनजातीय समुदाय के लोगों से संवाद करते समय वे उनसे अनुरोध करती हैं कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करें और विकास की मुख्य धारा में भी शामिल हों। जब भी वे विदेश यात्रा पर जाती हैं तब वे वहां के भारतीय समुदाय से अवश्य मिलती हैं और उनको भारत की विकास यात्रा में अधिक से अधिक योगदान देने के लिए प्रेरित करती हैं।
अपने संबोधन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शालीनता, विनम्रता, अनुभव और संविधान प्रति अपनी सम्पूर्ण प्रतिबद्धता से इस सर्वोच्च पद की गरिमा बढ़ाई है। उनकी जीवन-यात्रा असाधारण और अत्यन्त प्रेरणादायक रही है। ओडिशा के एक दूरवर्ती जनजातीय गांव के साधारण परिवेश से लेकर हमारे महान भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक की उनकी यह यात्रा भारतीय लोकतंत्र की शक्ति और समावेशी स्वरूप का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि झारखंड के राज्यपाल के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान राज्यभर में जिन लोगों से भी उनकी मुलाकात हुई, वे सभी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के राज्यपाल के रूप में कार्यकाल को बड़े स्नेह, सम्मान और प्रशंसा के साथ याद करते थे।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल की प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने अमृत उद्यान, राष्ट्रपति निकेतन और राष्ट्रपति तपोवन को आम जनता के लिए खोले जाने, राष्ट्रपति भवन को अधिक दिव्यांगजन-अनुकूल बनाए जाने तथा राष्ट्रपति भवन में चक्रवर्ती राजगोपालाचारी जी की प्रतिमा स्थापित किए जाने का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये सभी पहलें राष्ट्रपति पद को जन-जन के और निकट लाने तथा औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्त होने की सोच को अभिव्यक्त करती हैं।
संथाली भाषा में ओल चिकी लिपि में प्रकाशित भारत के संविधान का स्मरण करते हुए उपराष्ट्रपति ने इसे एक ऐतिहासिक पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल ने जनजातीय समाज को गौरव का अनुभव कराया और भारत की भाषाई एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के प्रति राष्ट्र की प्रतिबद्धता को और सुदृढ़ किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आज लोकार्पित ये पुस्तकें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के कार्यकाल के चार वर्षों की उन मूल भावनाओं और मूल्यों —संवैधानिकता, सेवा, करुणा, समावेशिता, सांस्कृतिक आत्मबल और राष्ट्रीय एकता—को संरक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
दिल्ली सरकार ने दिल्ली लक्ष्मी योजना को स्वीकृति दे दी है। दिल्ली सचिवालय में कल…
अमरीका ने कहा है कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कल रात पश्चिम…
भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गो डिजिट जनरल इंश्योरेंस लिमिटेड की होल्डिंग कंपनी गो डिजिट…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने आवास 7, लोक कल्याण मार्ग पर केन्द्र सरकार के सचिवों…
प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव के बढ़ते असर के बीच, केंद्रीय पत्तन, पोत…
झारखंड सरकार की ‘नई दिशा-नई पहल’ नक्सल विरोधी अभियान के तहत आज बड़ी सफलता मिली।…