प्रमुख वैश्विक समुद्री मार्गों पर भू-राजनीतिक तनाव के बढ़ते असर के बीच, केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने आज संघर्ष-संवेदनशील क्षेत्रों में मर्चेंट जहाजों पर कार्यरत भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण की व्यापक समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने प्रत्येक भारतीय नाविक की सुरक्षा, निरंतर जानकारी और हर संभव सहायता सुनिश्चित करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
इस समीक्षा बैठक में विदेश मंत्रालय (एमईए), नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ओमान, सऊदी अरब, ईरान, रूस और यूक्रेन सहित पश्चिम एशिया एवं ब्लैक सी क्षेत्र के देशों में तैनात भारतीय मिशनों के प्रमुखों ने भाग लिया। केंद्रीय मंत्री को मौजूदा सुरक्षा स्थिति, समुद्री गतिविधियों और भारतीय नाविकों से जुड़ी किसी भी आपात स्थिति में त्वरित सहायता प्रदान करने के लिए भारतीय राजनयिक मिशनों की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी गई।
बैठक के दौरान सर्बानंद सोणोवाल ने अधिकारियों को सभी एजेंसियों के बीच निरंतर समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया और इस बात पर बल दिया कि भारतीय नाविकों की सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “किसी भी भारतीय नाविक को भू-राजनीतिक संघर्ष के बीच फंसने नहीं दिया जाना चाहिए। हमारे नाविकों की सुरक्षा, उनके परिवारों को सहयोग और जहाँ भी आवश्यकता हो, समय पर सहायता सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाने चाहिए।”
नौवहन महानिदेशालय (डीजीएस) ने केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल को बताया किया कि उसका 24×7 नाविक शिकायत एवं सहायता सेल पूरी तरह से सक्रिय है। यह सेल समर्पित हेल्पलाइन, सूचना सेवाओं और शिकायत निवारण तंत्र के माध्यम से भारतीय नाविकों और उनके परिवारों को चौबीसों घंटे सहायता प्रदान कर रहा है।
नाविकों को जहाजों पर भेजने से पहले उनकी तैयारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से सर्बानंद सोणोवाल ने नाविकों के बीच जागरूकता बढ़ाने की पहलों की भी समीक्षा की। नाविकों को उन क्षेत्रों के परिचालन हालात, सुरक्षा प्रोटोकॉल और उभरते भू-राजनीतिक जोखिमों को बेहतर ढंग से समझने में सक्षम बनाने के लिए भर्ती और प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस धारकों (आरपीएलएस) के माध्यम से ओरिएंटेशन प्रोग्राम आयोजित किए जा रहे हैं।
संवेदनशील क्षेत्रों में लंबे समय तक तैनाती के मनोवैज्ञानिक प्रभाव के असर को समझते हुए, सर्बानंद सोणोवाल ने निर्देश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भारत के नाविक कल्याण ढांचे में शामिल किया जाए। उन्होंने नाविकों और उनके परिवारों—दोनों के लिए व्यवस्थित काउंसलिंग सेवाओं की आवश्यकता पर बल दिया और जोर देकर कहा कि परिचालन संबंधी जोखिमों के बारे में पारदर्शी संवाद, नाविकों को जहाजों पर भेजने से पहले उनकी तैयारियों का एक अनिवार्य हिस्सा होना चाहिए।
सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “हमारा दायित्व केवल नाविकों को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है। नाविक और उनके परिवार उन चुनौतियों के बारे में समय पर जानकारी, भावनात्मक सहयोग और पूर्ण पारदर्शिता के हकदार हैं, जिनका सामना वे समुद्र में ड्यूटी के दौरान कर सकते हैं। इन अनिश्चित परिस्थितियों में अपने समुद्री क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ मजबूती से खड़े रहने के लिए हमें अपने सहायता तंत्र के हर पहलू को मजबूत करना होगा।”
सर्बानंद सोणोवाल ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे विदेशों में भारतीय दूतावासों, शिपिंग कंपनियों, समुद्री प्राधिकरणों और सभी हितधारकों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखें। इससे किसी भी स्थिति से निपटने की हमारी व्यवस्था पहले से तैयार, एकजुट और तुरंत मदद पहुँचाने में सक्षम रहेगी।
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