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राष्ट्रपति ने भारतीय सैन्य अकादमी में 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण किया

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में 158वें नियमित पाठ्यक्रम और 141वें तकनीकी स्नातक पाठ्यक्रम की पासिंग आउट परेड का निरीक्षण किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा देश के सबसे कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने पर अधिकारी कैडेटों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि उनका साहस और बुद्धिमत्ता ही उनकी ताकत होगी। नौ महिला कैडेटों को देखकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि यह आईएमए के इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण है। यह न केवल भारत के रक्षा बलों के इतिहास में महत्‍वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि महिला नेतृत्व वाले विकास की दिशा में भारत की प्रगति का एक प्रेरणादायक उदाहरण भी है। उन्होंने विश्वास जताया कि और भी कई महिला कैडेट अकादमी में शामिल होंगी।

राष्ट्रपति ने मित्र देशों के कैडेटों को भी बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वे अपनी सेवा और आईएमए में सीखे गए मूल्यों के माध्यम से अपने सशस्त्र बलों और देशों के लिए उत्कृष्ट सेवाएं प्रदान करेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) में विदेशी कैडेटों की उपस्थिति विश्वभर के देशों के साथ मित्रता, सहयोग और शांतिपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस संस्थान में कैडेट आपसी विश्वास, समझ और पेशेवर संबंध विकसित करते हैं जो राष्ट्रों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

राष्ट्रपति ने अधिकारी कैडेटों से कहा कि वे हमारे राष्ट्र की संप्रभुता, एकता और अखंडता के रक्षक हैं। उन पर 140 करोड़ से अधिक नागरिकों का विश्वास है। उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि सेवा सर्वोच्च कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती सुरक्षा चुनौतियों, तकनीकी प्रगति और जटिल वैश्विक परिवेश के इस युग में भारतीय सेना को अनुकूलनशील और भविष्य के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने युवा अधिकारियों से जीवन भर सीखने वाले, साहसी निर्णय लेने वाले और नैतिक नेता बनने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेना अधिकारी होने के नाते, कैडेट सैनिकों का नेतृत्व करने, उनका मार्गदर्शन करने और उनकी देखभाल करने के लिए जिम्मेदार होंगे। उन्हें उदाहरण प्रस्तुत करते हुए नेतृत्व करना होगा, उनमें आत्मविश्वास जगाना होगा और टीम वर्क और समर्पण की भावना को प्रोत्साहित करना होगा। सैनिकों की भलाई के साथ-साथ परिचालन दक्षता को संतुलित करके, वे विश्वास का निर्माण करेंगे और जिन इकाइयों का वे नेतृत्व करेंगे, उनकी युद्ध क्षमता को मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि उनसे आगे बढ़कर नेतृत्व करने, अपने सैनिकों की देखभाल करने और हमारे सशस्त्र बलों की उत्कृष्ट परंपराओं को बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है।

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