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रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन मार्ग के दूसरे सुरंग के सफल निर्माण की घोषणा की

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महाराष्ट्र के पालघर में दूसरी पर्वतीय सुरंग के सफल निर्माण के साथ बुलेट ट्रेन परियोजना में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि की घोषणा की। यह सुरंग 454 मीटर लंबी और 14.4 मीटर चौड़ी है, जिसमें मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए ‘अप’ और ‘डाउन’ दोनों ट्रैक समाहित होंगे।

बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए पालघर जिले में एक महीने के भीतर यह दूसरी पर्वतीय सुरंग है, जिसका निर्माण कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है। इससे पहले 2 जनवरी 2026 को सफाले के पास एमटी-5 सुरंग का निर्माण कार्य पूरा किया गया था।

Bullet Train Project achieves another milestone.
2nd tunnel breakthrough in Palghar within a month.

📍 Palghar, Maharashtra pic.twitter.com/uv3QEsXvjp

— Ashwini Vaishnaw (@AshwiniVaishnaw) February 3, 2026
पर्वतीय सुरंग (एमटी-6) की खुदाई अत्याधुनिक ड्रिल-एंड-कंट्रोल्ड ब्लास्ट विधि, न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड (एनएटीएम) का उपयोग करके दोनों सिरों से की गई थी। खुदाई का काम 12 महीनों के भीतर पूरा हो गया। पर्वतीय सुरंग का सफल निर्माण अभियांत्रिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जब सुरंग के विपरीत छोरों से खुदाई कर रही टीमें अंततः केंद्र में मिलती हैं, जिससे पहाड़ के भीतर एक निरंतर मार्ग बनता है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने हाई-स्पीड रेल परियोजना में इस उल्लेखनीय प्रगति के लिए पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि टीम जिस गति से काम कर रही है, उससे देश में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। निर्माण और प्रौद्योगिकी में कई नए नवाचारों के कारण यह परियोजना वैश्विक ध्यान और प्रशंसा बटोर रही है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि परियोजना में उपयोग की जा रही कई उन्नत निर्माण प्रौद्योगिकियां और बड़ी मशीनें भारत निर्मित हैं।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बुलेट ट्रेन परियोजना के गुजरात खंड में अगले साल से वाणिज्यिक परिचालन शुरू होने की उम्मीद है। उन्होंने आगे कहा कि 2028 तक ठाणे तक हाई-स्पीड रेल परिचालन शुरू होने की उम्मीद है और यह कॉरिडोर 2029 तक मुंबई तक पहुंच जाएगा।

पालघर से लोकसभा सांसद डॉ. हेमंत विष्णु सवारा भी इस अवसर पर उपस्थित थे। उन्होंने पालघर में हाई-स्पीड टनल का निर्माण कार्य पूरा हो जाने के लिए केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) और आगामी वधवन पत्‍तन सहित कई प्रमुख रेल परियोजनाओं के माध्यम से जिले के तीव्र विकास पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि 2014 से महाराष्ट्र में रेलवे निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप परियोजनाओं का तेजी से पूरा होना और सेवाओं में सुधार हुआ है।

पालघर जिले जैसी जटिल भूगर्भीय स्थितियों और अनियमित सुरंग आकृतियों के लिए नई ऑस्ट्रियन टनलिंग विधि (एनएटीएम) को प्राथमिकता दी जाती है, जहां टनल बोरिंग मशीनें उतनी उपयुक्त नहीं होती हैं। इस प्रक्रिया में बहुत भारी मशीनरी की आवश्यकता नहीं होती है और शॉटक्रेटिंग, रॉक बोल्ट और लैटिस गर्डर्स का उपयोग करके वास्तविक समय में अनुकूलन संभव होता है।

सुरंग के अंदर काम करने वाले श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विभिन्न भू-तकनीकी उपकरणों, वास्तविक समय की निगरानी, ​​प्रभावी अग्नि सुरक्षा उपायों, उचित वेंटिलेशन और नियंत्रित पहुंच व्यवस्था का उपयोग किया गया था।

महाराष्ट्र में कई मोर्चों पर निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। वैतरणा नदी पर परियोजना का सबसे लंबा पुल पियर स्तर तक पहुंच चुका है, इसके अलावा उल्हास और जगानी जैसी अन्य प्रमुख नदियों पर नींव स्‍तर संबंधी कार्य चल रहा है। सभी चार स्टेशनों, प्रमुख राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों पर लंबे स्टील पुलों के निर्माण और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स और शिलफाटा के बीच 21 किलोमीटर लंबी सुरंग पर भी काम तेजी से प्रगति कर रहा है। महाराष्ट्र के पालघर जिले में कुल 7 पर्वतीय सुरंगों का निर्माण कार्य चल रहा है।

एमएएचएसआर परियोजना लगभग 508 किलोमीटर लंबी है, जिसमें से 352 किलोमीटर गुजरात और दादरा एवं नगर हवेली में तथा 156 किलोमीटर महाराष्ट्र में स्थित है। इस परियोजना से कॉरिडोर के साथ-साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने, ज्ञान के आदान-प्रदान में आसानी होने और नए औद्योगिक एवं आईटी केंद्रों के विकास में सहयोग मिलने की अपेक्षा है। यह कॉरिडोर साबरमती, अहमदाबाद, आनंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलिमोरा, वापी, बोइसर, विरार, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ेगा, जो भारत के परिवहन अवसंरचना में एक परिवर्तनकारी कदम होगा।

27 जनवरी, 2026 तक लगभग 334 किलोमीटर के वायडक्ट, 17 नदी पुल और राष्ट्रीय राजमार्गों, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचों पर बने 12 प्रमुख क्रॉसिंग का निर्माण पूरा हो चुका है। परियोजना के गुजरात खंड में ट्रैक बिछाने और विद्युतीकरण का कार्य तेजी से चल रहा है।

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