भारत

RRU और SSB अकादमी ने राष्ट्रीय सुरक्षा प्रशिक्षण तथा मान्यता बढ़ाने और राष्ट्रीय सुरक्षा उत्कृष्टता का नेतृत्व करने के लिए ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

देश के आंतरिक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में हाल ही में उठाए गए कदम में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (आरआरयू) और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) अकादमी ने अपने प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों के साथ विशेष सुरक्षा पाठ्यक्रमों को संबद्ध और मान्यता देने के लिए आज आधिकारिक तौर पर एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। औपचारिक हस्ताक्षर समारोह दिल्ली में एसएसबी मुख्यालय में हुआ, जिसमें आरआरयू के प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) कल्पेश एच. वांड्रा; आरआरयू में संबद्धता और प्रत्यायन के डीन अविनाश खरेल; और एसएसबी के महानिदेशक (डीजी) संजय सिंघल और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

यह कार्यनीतिक साझेदारी एक औपचारिक ढांचा तैयार करती है जहां राष्ट्रीय महत्व का संस्थान आरआरयू, एसएसबी अकादमी में आयोजित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों के लिए शैक्षणिक मान्यता प्रदान करेगा। समझौते की शर्तों के तहत, दोनों संस्थानों ने संकाय विशेषज्ञता, शैक्षणिक उपकरण और विशेष प्रशिक्षण सुविधाओं सहित संसाधनों के व्यापक आदान-प्रदान के लिए प्रतिबद्धता जताई है। इस सहयोग का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा में अकादमिक अनुसंधान और सीमा सुरक्षा बलों की व्यावहारिक तथा जमीनी आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटना है।

कार्यक्रम के दौरान, प्रोफेसर (डॉ.) कल्पेश एच. वांड्रा ने कहा कि यह सहयोग पहले से ही परिणाम दे रहा है। उन्होंने बताया कि आरआरयू ने हाल ही में एसएसबी अधिकारियों के लिए एक विशेष “स्मार्ट सीमा प्रबंधन” पाठ्यक्रम आयोजित किया है। पेशेवर विकास के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए, आरआरयू एसएसबी कर्मियों को अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और क्षेत्र-आधारित कार्यशालाओं के माध्यम से व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करेगा। इस पहल से एसएसबी के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम के नवीनतम होने की उम्मीद है, जिसमें सीमा निगरानी और आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों के लिए प्रौद्योगिकी-संचालित समाधानों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

एसएसबी महानिदेशक श्री संजय सिंघल ने बल के लिए आवश्यक शैक्षिक बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए आरआरयू की क्षमताओं पर दृढ़ विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस साझेदारी में अधिकारियों को सीमा प्रबंधन और आंतरिक सुरक्षा के उभरते परिदृश्य के अनुकूल तैयार करने के लिए उनका “कौशल विकास और पुन: कौशल” पर बहुत अधिक ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य दोनों संस्थानों की प्रतिभाओं का लाभ उठाकर सशस्त्र सीमा बल के भीतर निरंतर पेशेवर विकास के लिए एक मजबूत परितंत्र बनाना है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में स्थापित इस विश्वविद्यालय का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा और पुलिसिंग के क्षेत्र में एक अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान केंद्र के रूप में कार्य करना है। इसके लिए यह विशेषज्ञों के एक वैश्विक नेटवर्क का उपयोग करते हुए एक अनुशासित ढांचे के भीतर विशेष पेशेवर शिक्षा प्रदान करता है।

इस MoU के तहत, राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (RRU) SSB द्वारा संचालित मौजूदा और भविष्य के पाठ्यक्रमों को मान्यता प्रदान करेगा। इसके परिणामस्वरूप, RRU के ‘पाठ्यक्रमों के संयुक्त प्रत्यायन और प्रमाणन दिशानिर्देशों’ के आधार पर संबंधित उम्मीदवारों को प्रमाणपत्र (Certificate), डिप्लोमा, PG डिप्लोमा, एडवांस्ड डिप्लोमा, स्नातक (Bachelor’s) या स्नातकोत्तर (Master’s) की डिग्री प्रदान की जा सकती है।

इस साझेदारी में कार्यान्वयन के लिए एक तार्किक ढांचा शामिल है:

  1. पाठ्यक्रम मूल्यांकन: आरआरयू प्रशिक्षण के घंटों और अकादमिक क्रेडिट की सामग्री की समानता निर्धारित करने के लिए एसएसबी प्रतिष्ठानों में वर्तमान पाठ्यक्रम का मूल्यांकन करेगा।
  2. पाठ्यचर्या में वृद्धि: दोनों संस्थान विशिष्ट डिग्री या डिप्लोमा के लिए “अतिरिक्त क्रेडिट” आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अतिरिक्त पाठ्यक्रम सामग्री या पाठ्यक्रम को डिजाइन करने में सहयोग करेंगे।
  3. मानकीकृत मूल्यांकन: आरआरयू क़ानून द्वारा आवश्यक उच्च मानकों को बनाए रखने के लिए प्रत्येक मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम के लिए एक मजबूत मूल्यांकन प्रक्रिया और ग्रेडिंग तंत्र स्थापित किया जाएगा।

शैक्षणिक संपूर्णता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए, यह साझेदारी मौजूदा और अतिरिक्त पाठ्यक्रम सामग्री दोनों की आवधिक जांच और सत्यापन को अनिवार्य करती है। इस साझेदारी से यह सुनिश्चित होता है कि पाठ्यक्रम गतिशील बना रहे और उभरते सुरक्षा खतरों के प्रति उत्तरदायी रहे। इसके अलावा, इसके तहत सशस्त्र सीमा बल अकादमी में एक समर्पित आरआरयू डेस्क की स्थापना की जाएगी। यह प्रशासनिक केंद्र डेटा का प्रबंधन करेगा, दिन-प्रतिदिन के संचार को सुव्यवस्थित करेगा, और मान्यता प्रक्रिया के प्रभावी कार्यान्वयन की देखरेख करेगा, जिससे विश्वविद्यालय और अर्धसैनिक बल के बीच निर्बाध समन्वय सुनिश्चित होगा।

यह सहयोग गृह मंत्रालय के “एकीकृत प्रशिक्षण” दृष्टिकोण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो सैद्धांतिक अनुसंधान और व्यावहारिक सीमा प्रबंधन के बीच की खाई को पाटता है। यह समझौता ज्ञापन एसएसबी कर्मियों के कठोर प्रशिक्षण को प्रमाणित करकेउन्हें करियर में प्रगति के अवसर और शैक्षणिक मान्यता प्रदान करता है जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुरूप है।

एक प्रमुख आंतरिक सुरक्षा विश्वविद्यालय और एक अग्रिम पंक्ति के सीमा सुरक्षा बल के बीच यह तालमेल भारत की सुरक्षा संरचना को पेशेवर बनाने की दिशा में एक कार्यनीतिक कदम है। सामरिक प्रशिक्षण को नेशनल क्रेडिट फ्रेमवर्क (एनसीआरएफ) के साथ जोड़कर, यह समझौता ज्ञापन यह सुनिश्चित करता है कि एसएसबी अधिकारियों और कर्मियों का समर्पण देश भर में मान्यता प्राप्त औपचारिक शैक्षणिक उपलब्धियों में परिलक्षित हो।

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