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सागरमाला परियोजनाएं: 7000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश के साथ आंध्र प्रदेश को बदलना

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने आज आंध्र प्रदेश में सागरमाला परियोजना के अंतर्गत प्रस्तावों के संबंध में कृष्ण प्रसाद टेनेटी और वाईएस अविनाश रेड्डी द्वारा लोकसभा में उठाए गए एक तारांकित प्रश्न का उत्तर दिया। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री से सागरमाला परियोजना के अंतर्गत आंध्र प्रदेश सरकार और विशाखापत्तनम पोर्ट ट्रस्ट से 90 परियोजना प्रस्ताव प्राप्त होने के साथ-साथ उनकी विस्तृत जानकारी के बारे में पुष्टि करने के लिए कहा गया था, जिसमें अनुमानित लागत, अपेक्षित पूर्णता समय सीमा, निष्पादन विवरण और इन प्रस्तावों के संबंध में सरकार द्वारा उठाए गए कदम शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, वित्तीय वर्ष 2023-24 और 2024-25 के लिए इनमें से प्रत्येक परियोजना के लिए बजट आवंटन की जानकारी मांगी गई।

सर्बानंद सोनोवाल ने अपने उत्तर में सदन को बताया कि मंत्रालय को आंध्र प्रदेश सरकार से लगभग 3,300 करोड़ रुपये के 29 नए प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें बंदरगाह विकास, तटीय बर्थ, और मछली उतारने के केंद्र सहित विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। मंत्री महोदय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि आंध्र प्रदेश में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की 13 परियोजनाओं को वर्तमान में सागरमाला योजना के तहत वित्तीय सहायता मिल रही है। इन परियोजनाओं में रो-पैक्स और यात्री जेटी, मछली पकड़ने के बंदरगाह, बंदरगाह आधुनिकीकरण और कौशल विकास शामिल हैं। मंत्रालय ने इन परियोजनाओं के विकास के लिए पहले ही 450 करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं।

इसके अतिरिक्त, विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी और आईडब्ल्यूएआई ने आंध्र प्रदेश में 4,600 करोड़ रुपये के संयुक्त निवेश के साथ 36 परियोजनाएं शुरू की हैं। इनमें से 2,530 करोड़ रुपये की लागत वाली 22 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 2,070 करोड़ रुपये की 14 परियोजनाएं कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं। विश्व भर के यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने के लिए विशाखापत्तनम बंदरगाह पर एक अत्याधुनिक अंतर्राष्ट्रीय क्रूज सह तटीय टर्मिनल बनाया गया है।

पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय की सागरमाला योजना के अंतर्गत उच्च सामाजिक प्रभाव वाली लेकिन बिना रिटर्न या कम आंतरिक रिटर्न दर वाली परियोजनाओं को वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। मंत्रालय ने 29 नए प्रस्तावों में से 1,200 करोड़ रुपये की 4 परियोजनाओं को आंशिक रूप से वित्त पोषित किया है। भवनपाडु बंदरगाह, रामायपत्तनम बंदरगाह और मछलीपत्तनम बंदरगाह के विकास से संबंधित परियोजनाओं के लिए आंध्र प्रदेश सरकार से परियोजनाओं का पुनर्गठन करने और पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत पूंजी निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता के तहत वित्त पोषण की संभावना का पता लगाने का अनुरोध किया गया है। जहाज ठहरने के स्थानों और मछली उतारने के केन्द्रों (एफएलसी) से संबंधित परियोजनाएं भी वित्त मंत्रालय को उनके आवश्यक अनुमोदनों के लिए अग्रेषित कर दी गई हैं।

सर्बानंद सोनोवाल ने बल देकर कहा कि सागरमाला कार्यक्रम एक प्रमुख पहल है जिसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र को बदलना और बंदरगाह आधारित विकास के लिए देश की व्यापक तटरेखा और जहाजों के चलने योग्य जलमार्गों का लाभ उठाना है। इन परियोजनाओं के लिए वित्त पोषण सार्वजनिक-निजी भागीदारी, इक्विटी भागीदारी और अनुदान सहायता के मिश्रण के माध्यम से प्रदान किया जाता है, यह सुनिश्चित करते हुए कि सरकार की ओर से कोई वित्तीय बाधा नहीं है।

सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई और विशाखापत्तनम में मेरीटाइम और जहाज निर्माण (सीईएमएस) में दो उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना का भी उल्लेख किया। विशाखापत्तनम केंद्र एशिया में अपनी तरह का पहला है, जिसने 10,000 से अधिक छात्रों को इंजीनियरिंग और तकनीकी कौशल से लैस किया है।

इसके अलावा, हाल ही में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय ने सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मोड के माध्यम से वर्तमान 80 बिस्तर वाले गोल्डन जुबली अस्पताल को 300 बिस्तर वाले मल्टी-डिसिप्लिनरी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में उन्नत करने के लिए विशाखापत्तनम पोर्ट अथॉरिटी (वीपीए) के परियोजना प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की अनुमानित कुल लागत 222.43 करोड़ रुपए है। इस परियोजना से वीपीए कर्मचारियों के उपचार पर किए गए वार्षिक चिकित्सा व्यय को तर्कसंगत बनाने और चिकित्सा, पैरामेडिकल तथा अन्य कर्मचारियों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की आशा है।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि पिछले दशक में देश की बंदरगाह क्षमता 2022-23 में ~2,500+ एमटीपीए (2014-15 से 86 प्रतिशत वृद्धि) थी और प्रमुख बंदरगाहों पर कार्गो हैंडलिंग क्षमता दोगुनी हो गई है।

यह व्यापक अपडेट सागरमाला कार्यक्रम के माध्यम से समुद्री अवसंरचना को बढ़ाने और तटीय सामुदायिक विकास को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालता है।

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