भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड – सेबी द्वारा स्थापित राष्ट्रीय प्रतिभूति बाजार संस्थान – एनआईएसएम और कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय के संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स – आईआईसीए ने देश में कॉर्पोरेट गवर्नेंस, किसी कंपनी के संचालन, स्थिरता और नैतिक प्रथाओं के मूल्यांकन के वैश्विक ढांचे पर्यावरण, सामाजिक और शासन – ईएसजी और पूंजी बाजारों को बढ़ावा देने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
ये दोनों संस्थान संयुक्त रूप से क्षमता विकास कार्यक्रम, प्रमाणन पाठ्यक्रम, कार्यकारी शिक्षा मॉड्यूल और प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करेंगे और उन्हें कार्यान्वित करेंगे, जिनमें सेबी के अधिकारियों और अन्य नियामक और वित्तीय क्षेत्र के संस्थानों के अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं।
इस समझौता ज्ञापन पर 19 मई 2026 को मुंबई में हस्ताक्षरित किया गया, जिसमें सेबी अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे उपस्थित थे।
सेबी अध्यक्ष ने प्रदर्शन-आधारित कॉर्पोरेट गवर्नेंस परितंत्र निर्मित करने के महत्व पर जोर दिया, जिसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को पूंजी बाजारों तक पहुंच प्रदान करना, स्थिरता संबंधी खुलासों (कंपनियों द्वारा अपने पर्यावरणीय, सामाजिक और शासन प्रदर्शन से जुड़े गैर-वित्तीय प्रभाव, जोखिम और अवसरों को सार्वजनिक करने की प्रक्रिया) सुदृढ़ करना और उभरते नियामक क्षेत्रों में साक्ष्य-आधारित ज्ञान को बढ़ावा देना है।
आईआईसीए के महानिदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ज्ञानेश्वर कुमार सिंह द्वारा यह सहयोग विचारित किया गया है। उन्होंने कॉर्पोरेट गवर्नेंस, ईएसजी, दायित्वपूर्ण व्यावसायिक आचरण आदि क्षेत्रों में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स की महत्वपूर्ण पहल में उल्लेखनीय भूमिका भूमिका निभाई है और राष्ट्रीय विकास एजेंडा के साथ उन्हें जोड़ा है।
समझौता ज्ञापन हस्ताक्षर समारोह में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्योरिटीज़ मार्केट्स – एनआईएसएम के निदेशक शशि कृष्णन भी मौजूद थे। समझौता ज्ञापन पर एनआईएसएम की रजिस्ट्रार योगिता जाधव और आईआईसीए के स्कूल ऑफ बिजनेस एनवायरनमेंट की प्रमुख डॉ. गरिमा दाधिच ने हस्ताक्षर किए।
इस समझौता ज्ञापन के तहत प्रतिभूति बाजारों, स्थिरता और ईएसजी रिपोर्टिंग, व्यावसायिक उत्तरदायित्व और स्थिरता रिपोर्टिंग – बीआरएसआर जैसे क्षेत्रों में जानकारी आदान-प्रदान, क्षमता विकास, अनुसंधान, नीतिगत समर्थन और संस्थागत सहयोग सुदृढ़ करने के लिए दोनों संस्थानों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक सहयोग स्थापित करता है।
इसके अलावा, देनदारियों का भुगतान करने में असमर्थता, निवेशकों को शिक्षा, मूल्यांकन, दायित्वपूर्ण निवेश, सतत वित्त, बोर्ड प्रशासन, बाजार साख, एमएसएमई और उभरते नियामक ढांचे जैसे क्षेत्रों में भी इन दोनों संस्थानों का सहयोग होगा।
दोनों संस्थान अनुसंधान, नीति अध्ययन, पाठ्यक्रम निर्माण और सर्वोत्तम प्रथाओं के प्रसार में सहयोग करेंगे। साझेदारी के तहत प्रमुख सम्मेलन संयुक्त रूप से आयोजित करना, संकायों का आदान-प्रदान, प्रकाशन आदि का भी विचार है।
यह सहयोग भारत के प्रतिभूति बाजारों और कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए सुशासित, समावेशी और ज्ञान-आधारित पारितंत्र निर्मित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
सर्वोच्च न्यायलय ने आज केंद्र सरकार से जवाब मांगा कि एसिड की खुदरा बिक्री पर…
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की अंतरराष्ट्रीय शाखा एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) ने…
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में बिहार…
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून की पहली तिमाही में भारत…
बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की आज…
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज कोच्चि में राजगिरी स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आरएसईटी)…