भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड- सेबी ने म्यूचुअल फंड शुल्क संरचना में व्यापक बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसका उद्देश्य शुल्कों को अधिक स्पष्ट, न्यायसंगत और निवेशकों के लिए अधिक लाभकारी बनाना है। ये प्रस्ताव सेबी (म्यूचुअल फंड) विनियम, 1996 की समीक्षा पर एक परामर्श पत्र में प्रस्तुत किए गए हैं। बाजार नियामक ने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, पारदर्शिता बढ़ाना और यूनिट धारकों के लिए लागत कम करना है। नए ढांचे के तहत, प्रतिभूति लेनदेन कर (एसटीटी), जीएसटी और स्टाम्प ड्यूटी जैसे करों और सरकारी शुल्कों को म्यूचुअल फंड व्यय अनुपात से बाहर रखा जाएगा और उन्हें अलग से दिखाया जाएगा, ताकि निवेशकों से सीधे वसूला जा सके।
सेबी ने परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों (एएमसी) द्वारा वर्तमान में अपनी प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों पर लगाए जाने वाले अस्थायी 5 आधार अंकों के अतिरिक्त व्यय को हटाने का भी प्रस्ताव दिया है। इस बदलाव को संतुलित करने के लिए, नियामक ने ओपन-एंडेड सक्रिय योजनाओं के लिए आधार कुल व्यय अनुपात (टीईआर) स्लैब में 5 आधार अंकों की वृद्धि का सुझाव दिया है।
एक अन्य प्रमुख प्रस्ताव में, सेबी ने एक वैकल्पिक प्रदर्शन-आधारित टीईआर ढाँचा पेश किया है, जो फंड हाउसों को किसी योजना के प्रदर्शन के आधार पर शुल्कों में संशोधन करने की अनुमति देता है। इस प्रस्ताव में ब्रोकरेज तथा लेनदेन लागतों की सीमा को और सख्त करने की भी सिफारिश की गई है, जिसके तहत ब्रोकरेज शुल्क को नकद बाजार लेनदेन के लिए 12 आधार अंकों से घटाकर 2 आधार अंक और डेरिवेटिव बाजार के लिए 5 आधार अंकों से घटाकर 1 आधार अंक कर दिया गया है।
सेबी ने प्रस्तावित ढाँचे पर 17 नवंबर तक जनता की टिप्पणियाँ आमंत्रित की हैं।
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