बांग्लादेश में जमात-ए-इस्लामी की महिला इकाई की वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी में महिलाओं को शीर्ष पद न देने के फैसले का समर्थन किया है। इन महिला नेताओं ने धार्मिक मान्यताओं के आधार पर सिर्फ़ पुरुषों के ही नेतृत्व वाली व्यवस्था को उचित ठहराया है। हालांकि इसकी कड़ी आलोचना हुई है और लोगों का मानना है कि इस तरह की सोच पुरुष प्रधान मानसिकता और लैंगिक समानता की उपेक्षा को दर्शाती है।
बांग्लादेश जमात–ए–इस्लामी की महिला शाखा की वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी की उस नीति का बचाव किया है, जिसमें महिलाओं को शीर्ष नेतृत्व पदों पर आने की अनुमति नहीं है। उनका कहना है कि जमात एक इस्लामी संगठन है और उसका मानना है कि नेतृत्व की भूमिका पुरुषों के पास होनी चाहिए। महिला शाखा की सचिव नुरुन्निसा सिद्दिका ने कहा कि पुरुषों को महिलाओं का संरक्षक माना जाता है और पार्टी की मान्यताओं के अनुसार महिलाएं आमीर यानी प्रमुख नहीं बन सकतीं। ढाका और अन्य इलाकों में छात्रों, महिला संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन किए हैं। प्रदर्शनकारी सार्वजनिक माफी की मांग कर रहे हैं और जमात के कथित महिला–विरोधी विचारों के खिलाफ बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं।
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