खेल

स्पोर्ट्स मेडिसिन और एथलीटों की देखभाल को बेहतर बनाने के लिए स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर, सफदरजंग अस्पताल और SAI ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत सफदरजंग अस्पताल के स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) और युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (एसएआई) ने आज यहां एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के खेल विभाग के सचिव श्री हरि रंजन राव की मौजूदगी में किया गया।

यह समझौता ज्ञापन भारतीय खेल प्राधिकरण से जुड़े खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को व्यापक स्पोर्ट्स मेडिसिन और स्वास्थ्य सेवाएँ देने के लिए संस्थागत सहयोग को मज़बूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। सफदरजंग अस्पताल का स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर भारत का प्रमुख टर्शियरी केयर सेंटर है, जो पूरी तरह से स्पोर्ट्स मेडिसिन, आर्थ्रोस्कोपी, स्पोर्ट्स इंजरी मैनेजमेंट, पुनर्वास और खेल विज्ञान के लिए समर्पित है। भारतीय खेल प्राधिकरण देश भर में खेल प्रतिभाओं को निखारने और विश्व-स्तरीय खिलाड़ी तैयार करने में अहम भूमिका निभाती है।

यह सहयोग एसआईसी की चिकित्सकीय विशेषज्ञता और एसएआई के व्यापक एथलीट समर्थन नेटवर्क को एक साथ लाता है, ताकि एथलीटों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए एक व्यापक और समन्वित मॉडल बनाया जा सके। इस साझेदारी का मकसद स्पोर्ट्स इंजरी से बचाव, जांच, इलाज, पुनर्वास और स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है, जिससे एथलीट अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें और उसे बनाए रख सकें। चिकित्सकीय देखभाल के अलावा, एमओयू में खेल विज्ञान, चिकित्सकीय शिक्षा, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्रों में भी सहयोग की परिकल्पना की गई है। दोनों संस्थान मिलकर ऐसी अनुसंधान परियोजनाओं पर काम करेंगे, जिनका मकसद इलाज के नए तरीके विकसित करना, चोट से बचाव की रणनीतियों को बेहतर बनाना, प्रमाण आधारित स्पोर्ट्स मेडिसिन प्रैक्टिस को बढ़ावा देना और एथलीटों की सेहत और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए वैज्ञानिक नवाचार को बढ़ावा देना है।

इस मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस सहयोग को खेल के क्षेत्र में उत्कृष्टता की ओर भारत की यात्रा में योगदान देने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने स्वास्थ्य देखभाल के नज़रिए से मंत्रालय की ओर से हर संभव मदद का भरोसा दिलाया और इस एमओयू को स्वास्थ्य और खेल क्षेत्रों के बीच एक लंबी अवधि की साझेदारी की शुरुआत बताया।

यह मानते हुए कि एथलीट देश के हर हिस्से में तैयार हो रहे हैं, श्रीमती श्रीवास्तव ने भरोसा दिलाया कि मंत्रालय स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाओं के नेटवर्क को बढ़ाने और स्पोर्ट्स मेडिसिन में स्नात्तकोत्तर शिक्षा को मज़बूत करने के तरीकों पर विचार करेगा, ताकि प्रशिक्षित विशेषज्ञों की एक बड़ी टीम तैयार की जा सके। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि ऑर्थोपेडिक चोटों के मामले में एथलीटों की स्वास्थ्य देखभाल के साथ-साथ, मंत्रालय अन्य खास स्वास्थ्य ज़रूरतों के लिए भी मदद पर विचार करेगा। इसके लिए संबंधित मेडिकल क्षेत्रों की पहचान की जाएगी और जहाँ भी ज़रूरत होगी, सहयोग और खास देखभाल के लिए निम्हांस जैसे संस्थानों को शामिल किया जाएगा।

श्रीमती श्रीवास्तव ने नए एम्स संस्थानों को स्पोर्ट्स मेडिसिन सुविधाएँ विकसित करने और एथलीट स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित करने का भी वादा किया। उन्होंने शोध के लिए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, जिनसे एथलीटों के प्रदर्शन में सुधार हो सके, खासकर उन क्षेत्रों में, जहाँ स्पोर्ट्स मेडिसिन अभी विकसित हो रही है और खास सेवाएँ सीमित हैं। स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर और भारतीय खेल प्राधिकरण द्वारा पहले से किए जा रहे कामों की तारीफ़ करते हुए, उन्होंने भरोसा दिलाया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारतीय एथलीटों के लिए शोध, संस्थागत सहयोग और खास स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं को मज़बूत करने में पूरा सहयोग देगा।

युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के खेल विभाग के सचिव श्री हरि रंजन राव ने अपने संबोधन में भारतीय एथलीटों की ज़रूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने के लिए स्पोर्ट्स मेडिसिन और खेल विज्ञान में घरेलू स्तर पर अनुसंधान को मज़बूत करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि स्पोर्ट्स मेडिसिन के कई मौजूदा प्रोटोकॉल, आकलन के साधन और वैज्ञानिक मानक अमेरिकी और पश्चिमी डेटा पर आधारित हैं, जो शरीर की बनावट और शारीरिक क्रियाओं में अंतर के चलते भारतीय एथलीटों के लिए हमेशा उपयुक्त नहीं हो सकते हैं। उन्होंने एथलीटों के प्रदर्शन, चोट से बचाव और पुनर्वास में मदद के लिए भारत-विशिष्ट वैज्ञानिक प्रमाण तैयार करने और घरेलू प्रोटोकॉल विकसित करने के महत्व पर भी ज़ोर दिया।

संस्थागत सहयोग बढ़ाने की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए, श्री राव ने देश भर के मेडिकल कॉलेजों को स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में शामिल करने के लिए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय से सहयोग मांगा। उन्होंने विशेष चिकित्सा सहायता, शोध और प्रशिक्षण की सुविधा के लिए एसएआई के उत्कृष्टता केंद्रों को आस-पास के मेडिकल कॉलेजों से जोड़ने का सुझाव दिया, साथ ही आर्थोपेडिक और अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों को एथलीटों के साथ मिलकर काम करने के अवसर का भी सुझाव दिया। उन्होंने इस एमओयू को “भारतीय एथलीटों के दीर्घकालिक लाभ के लिए शोध, क्षमता निर्माण और प्रमाण-आधारित स्पोर्ट्स मेडिसिन को मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम” बताया।

इस मौके पर एमओएचएफडब्ल्यू के स्वास्थ्य सेवाओं के महानिदेशक डॉ. लवनीश जी. कृष्णा, एसएआई सचिव श्री राम सिंह, एमओएचएफडब्ल्यू के संयुक्त सचिव (हॉस्पिटल्स) डॉ. मनस्वी कुमार, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के संयुक्त सचिव (खेल) श्री विनील कृष्णा रावेल्ला, सफदरजंग हॉस्पिटल की निदेशक डॉ. कविता रानी शर्मा, स्पोर्ट्स इंजरी सेंटर (एसआईसी) के निदेशक डॉ. दीपक जोशी,एसएआई के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक, और स्वास्थ्य तथा परिवार कल्याण और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

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